चीन में भारत का परचम, कैमूर के रवि प्रकाश की टीम ने जीता अंतरराष्ट्रीय सम्मान

हार्बिन इंटरनेशनल स्नो स्कल्पचर प्रतियोगिता में भारत को तीसरा स्थान

By VIKASH KUMAR | January 10, 2026 4:12 PM

हार्बिन इंटरनेशनल स्नो स्कल्पचर प्रतियोगिता में भारत को तीसरा स्थान फ्रीडम फ्रॉम बाउंड्रीज कलाकृति को मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना भभुआ सदर. जिले के ग्राम पकड़िहार, अमेठ पंचायत निवासी रवि प्रकाश ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश और जिले का नाम रोशन किया है. चीन में छह से नौ जनवरी 2026 तक आयोजित 28 वें हार्बिन इंटरनेशनल आइस एंड स्नो स्कल्पचर प्रतियोगिता में भारतीय टीम अभ्युदय ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया है. यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता सन आइलैंड इंटरनेशनल स्नो स्कल्पचर आर्ट एक्सपो के अंतर्गत आयोजित की गयी थी. इसमें दुनिया के 16 देशों की 25 अंतरराष्ट्रीय टीमों ने भाग लिया. भारतीय टीम की अगुवाई रवि प्रकाश ने की थी. टीम द्वारा बनायी गयी बर्फ की विशाल कलाकृति का शीर्षक फ्रीडम फ्रॉम बाउंड्रीज था. यह कलाकृति पूरी तरह शुद्ध बर्फ से तैयार की गयी थी. भारतीय टीम अभ्युदय द्वारा निर्मित यह बर्फ की कलाकृति फ्रीडम फ्रॉम बाउंड्रीज स्वतंत्रता, साहस और सीमाओं से परे उड़ान का प्रतीक है. इस 14 फुट ऊंची, 10 फुट लंबी और 10 फुट चौड़ी स्नो स्कल्पचर में एक पंखों वाला घोड़ा दर्शाया गया है, जो एक ठोस फ्रेम को तोड़ते हुए आगे बढ़ रहा है. यह आकृति मानव की रचनात्मक शक्ति, विचारों की आजादी और सीमाओं को पार करने की क्षमता को दर्शाती है. पूरी कलाकृति शुद्ध बर्फ से बनायी गयी है,जो कठोर परिस्थितियों में भी कला के माध्यम से आशा और स्वतंत्रता का संदेश देती है. कड़ाके की ठंड (-25 से -30 डिग्री सेल्सियस) और कठिन परिस्थितियों के बावजूद टीम ने अपने अदम्य साहस, अनुशासन और देशभक्ति की भावना के साथ समय पर इस उत्कृष्ट कलाकृति को पूरा किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय जूरी ने खूब सराहा. टीम अभ्युदय का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही उत्कृष्ट रिकॉर्ड रहा है. इससे पूर्व टीम जापान में पार्टी चॉइस अवार्ड सहित अमेरिका और चीन में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुकी है और अब तक टीम को 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. अपने इस सफलता पर टीम लीडर रहे रवि प्रकाश ने सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों, जिले के लोगों और टीम के सभी सदस्यों को दिया है. यह उपलब्धि न केवल कैमूर जिले के लिए बल्कि पूरे बिहार और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है कि सीमित संसाधनों से भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.

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