बर्फीली हवाओं से ठंड का कहर बरकरार. गुरुवार रहा सबसे ठंडा दिन

न्यूनतम तापमान सात डिग्री व अधिकतम भी रहा 16 डिग्री सेल्सियस

न्यूनतम तापमान सात डिग्री व अधिकतम भी रहा 16 डिग्री सेल्सियस धूप के बावजूद कम नहीं हुई कनकनी, शीतलहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त भभुआ सदर. पहाड़ों की तरफ से आने वाली बर्फीली हवाओं के कारण ठंड व कनकनी का असर लगातार बना हुआ है. एक-दो दिन दोपहर में धूप निकलने के बावजूद ठंड और कनकनी में कमी नहीं दिख रही है. हालांकि दिन के समय धूप निकलने पर कुछ देर के लिए लोगों को राहत मिलती है, लेकिन दोपहर ढलते ही फिर से ठंड का असर बढ़ जा रहा है. गुरुवार को सुबह करीब 10 बजे हल्की धूप निकली और दोपहर 12 बजे के बाद अच्छी धूप भी देखने को मिली, लेकिन तापमान पर इसका खास असर नहीं पड़ा. सुबह के समय न्यूनतम तापमान में एक डिग्री की गिरावट दर्ज की गयी. गुरुवार को शहर का अधिकतम तापमान 16 डिग्री व न्यूनतम तापमान सात डिग्री रिकॉर्ड किया गया. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले पांच दिनों तक मौसम इसी तरह बना रहने की संभावना है. दिन में धूप खिलेगी, लेकिन ठंड व कनकनी का असर बरकरार रहेगा. पूर्वी उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे होने के कारण कैमूर जिले में ठंड का असर और अधिक देखने को मिल रहा है. पिछले एक सप्ताह से पछुआ हवाओं के साथ बढ़ी ठंड ने हर तबके को परेशान कर रखा है. ठंड की प्रचंडता से मनुष्यों के साथ-साथ पशुओं को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. इस सीजन का अब तक का सबसे ठंडा दिन गुरुवार रहा, जब न्यूनतम तापमान सात डिग्री व अधिकतम तापमान 20 डिग्री से नीचे गिरकर 16 डिग्री तक पहुंच गया. ठंड के बीच प्रशासन का दावा है कि गरीबों व बेसहारों के लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में कंबल बांटे जा रहे हैं और जगह-जगह अलाव की व्यवस्था की गयी है, लेकिन ठंड के जबर्दस्त कहर के आगे ये इंतजाम भी नाकाफी साबित हो रहे हैं. कुहासा व शीतलहर से अभी नहीं मिलेगी राहत जिला सांख्यिकी विभाग के अनुसार फिलहाल कुहासा व शीतलहर से राहत मिलने की संभावना नहीं है. मौसम परामर्श केंद्र द्वारा जारी अगले 72 घंटे के पूर्वानुमान में आसमान में घना कुहासा छाये रहने की आशंका जतायी गयी है. इस दौरान 10 से 18 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से पछुआ हवा चलने की संभावना है. मौसम साफ रहने की स्थिति में पाला गिर सकता है. तापमान में और गिरावट आने से शीतलहर का प्रकोप और बढ़ सकता है. इनसेट कुहासा और ठंड से गेहूं, आलू सहित अन्य फसलों को फायदा भभुआ सदर. पिछले एक सप्ताह से पड़ रहे कुहासे व बढ़ी जबरदस्त ठंड पर कृषि वैज्ञानिक अमित कुमार ने बताया कि यह मौसम रबी की अधिकांश फसलों के लिए अनुकूल है. शीतलहर मक्का व गेहूं की फसल के लिए अति आवश्यक मानी जाती है. दोनों फसल ठंड व शीत के प्रभाव से और मजबूत हुए हैं. उन्होंने बताया कि अरहर व सरसों की इतनी अच्छी फसल बरसों बाद देखने को मिल रही है. उन्होंने बताया कि सहफसली खेती के तहत एक साथ की गयी आलू, मक्का, राजमा, धनिया, ब्रोकली समेत सात-आठ किस्म की अन्य फसलें भी काफी सुंदर व मजबूत दिखाई दे रही हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ राम सुमिरन सिंह ने बताया कि इस मौसम में थोड़ी सी असावधानी फसलों पर भारी पड़ सकती है. मौसम साफ रहने पर तो नुकसान की संभावना कम है, लेकिन हल्के बादल के साथ चलने वाली हवा में फूल आये सरसों व अन्य फसलों पर लाही का प्रकोप देखा जा सकता है. मौजूदा मौसम के अनुसार एक-दो दिनों में लाही का प्रकोप बड़े पैमाने पर फैल सकता है. ऐसे में किसान तुरंत इसके बचाव के लिए अनुशंसित दवा का प्रयोग कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि आलू व अन्य पाले से प्रभावित होने वाली फसलों पर पाला नाशक दवा का अविलंब प्रयोग करें. साथ ही 15 दिनों के अंतराल पर हल्की सिंचाई खेतों में अवश्य की जानी चाहिए. आलू की फसल बचाने के लिए मेड़ों पर जलाएं अलाव सेवानिवृत्त कृषि विज्ञानी शिवपूजन सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि आलू की फसल को पाले से बचाने के लिए सिंचाई कर दें या खेत की मेड़ों पर अलाव जलाएं. उन्होंने बताया कि रिडोमिल दवा 1 लीटर पानी में 2 ग्राम मिलाकर स्प्रे करें. वहीं, पशुपालकों को सलाह दी गयी है कि वे अपने पशुओं को हल्का गुनगुना पानी में गुड़ का घोल पिलाएं. साथ ही मुर्गी व अन्य पक्षियों के दरबों को चारों तरफ से बंद रखें, ताकि ठंडी हवा का असर कम हो सके.

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Author: VIKASH KUMAR

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