फर्जीवाड़ा में गिरफ्तार गुलडिहा उत्क्रमित मध्य विद्यालय के शिक्षक निलंबित

निगरानी जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा, डीपीओ स्थापना ने की कार्रवाई

= = निगरानी जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा, डीपीओ स्थापना ने की कार्रवाई निलंबन अवधि के लिए चांद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय को बनाया गया मुख्यालय. भभुआ नगर. जिले के चैनपुर प्रखंड में फर्जीवाड़ा के मामले में गिरफ्तार किये गये एक शिक्षक पर शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में मामला सामने आने के बाद शिक्षक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी के निर्देश पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना शंभू कुमार सिंह ने संबंधित शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. शिक्षा विभाग से जारी आदेश के बाद शिक्षकों में हड़कंप मच गया है. जानकारी के अनुसार उत्क्रमित मध्य विद्यालय गुलडिहा, प्रखंड चैनपुर में कार्यरत विशिष्ट शिक्षक सत्येंद्र नाथ पर फर्जीवाड़ा का आरोप लगा था. मामले की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना द्वारा की जा रही थी. जांच के दौरान शिक्षक पर लगे आरोप सही पाये गये. इसके बाद चैनपुर थाने में प्राथमिक की दर्ज होने के बाद पांच मार्च को शिक्षक सत्येंद्र नाथ को गिरफ्तार कर लिया गया, साथ ही गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. शिक्षक की गिरफ्तारी की सूचना मिलने के बाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी चैनपुर ने पूरे मामले की रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को भेजी. रिपोर्ट के आधार पर डीपीओ स्थापना ने कार्रवाई करते हुए बिहार विशिष्ट शिक्षक नियमावली 2023 तथा सरकारी सेवक वर्गीकरण नियमावली 2025 के प्रावधानों के तहत शिक्षक सत्येंद्र नाथ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. आदेश में कहा गया है कि जेल में रहने की अवधि को छोड़ कर निलंबन अवधि में नियमानुसार निलंबन भत्ता देय होगा. = जेल से छूटने के बाद निर्धारित मुख्यालय में देना होगा योगदान जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान शिक्षक का मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी चांद का कार्यालय निर्धारित किया गया है. वहीं, उपस्थापन पदाधिकारी के रूप में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी चैनपुर तथा संचालन पदाधिकारी के रूप में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मध्याह्न भोजन योजना कैमूर को नामित किया गया है. विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि जेल से रिहा होने के बाद शिक्षक को अपने निर्धारित मुख्यालय में योगदान देना होगा. इसके साथ ही उनके खिलाफ आरोप पत्र भी अलग से जारी किया जायेगा. गौरतलब है कि शिक्षा विभाग इन दिनों सरकारी विद्यालयों में पारदर्शिता और अनुशासन को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाये हुए है. ऐसे मामलों में दोषी पाये जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है, जिससे विभाग में साफ संदेश दिया जा सके कि किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जायेगी.

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Author: VIKASH KUMAR

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