नेता और कारोबारी ही नहीं अधिकारी व कर्मचारी भी हथियार रखने के शौकीन

KAIMUR NEWS.कैमूर जिले में हथियार का लाइसेंस लेना सरकारी नौकरी लेने के बराबर माना जाता है. क्योंकि, इस जिले में हथियार का लाइसेंस लेना एक स्टेटस सिंबल बन गया है. विगत चार से पांच डीएम के कार्यकाल में जारी किये गये लाइसेंस पर अगर नजर डालें तो जिले में सिर्फ नेता, कारोबारी और ठेकेदार ही हथियार के शौकीन नहीं है, बल्कि इस जिले के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक हथियार रखने के शौकीन है.

जिले में डीएम से लेकर डाटा ऑपरेटर तक ने लिया है हथियार का लाइसेंस

हथियार का लाइसेंस लेना बन गया है स्टेटस सिंबल

भभुआ कार्यालय.

कैमूर जिले में हथियार का लाइसेंस लेना सरकारी नौकरी लेने के बराबर माना जाता है. क्योंकि, इस जिले में हथियार का लाइसेंस लेना एक स्टेटस सिंबल बन गया है. विगत चार से पांच डीएम के कार्यकाल में जारी किये गये लाइसेंस पर अगर नजर डालें तो जिले में सिर्फ नेता, कारोबारी और ठेकेदार ही हथियार के शौकीन नहीं है, बल्कि इस जिले के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक हथियार रखने के शौकीन है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि पूर्व डीएम सुनील कुमार ने स्वयं के साथ कई अन्य अधिकारी और कर्मचारियों को भी हथियार का लाइसेंस दिया है. हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब अधिकारियों और कर्मचारियों को डीएम ने लाइसेंस दिया है. इसके पहले के भी डीएम ने अधिकारियों व कर्मचारी यहां तक की डाटा ऑपरेटर तक को हथियार का लाइसेंस दिया है. कुल मिलाकर देखें तो हथियार के लाइसेंस के लिए जो आवेदन अभी भी डीएम के विधायी शाखा में विचाराधीन हैं, वहां पर बड़ी संख्या में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के हथियार के लाइसेंस के आवेदन है.

पूर्व डीएम का स्वयं लाइसेंस लिया जाना बना चर्चा का विषय

पूर्व डीएम सुनील कुमार का स्वयं ही हथियार का लाइसेंस लिया जाना जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है. इसके पहले भी डीएम के द्वारा डीएम के पद पर रहते हुए स्वयं को लाइसेंस दिया गया है. भले ही डीएम के पद पर रहते हुए स्वयं को लाइसेंस दिए जाने पर कोई कानूनी रोक नहीं है. लेकिन, आम लोग इसे सही नहीं मान रहे हैं. लोगों का मानना है कि डीएम के पद पर जो व्यक्ति बैठता है, वह इसकी समीक्षा करता है कि हथियार के लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति की सुरक्षा को लेकर अगर खतरा है, तो उसे लाइसेंस उसकी सुरक्षा के लिए निर्गत करता है. डीएम द्वारा स्वयं डीएम के पद पर रहते हुए अपनी सुरक्षा का समीक्षा कर लेना और अपने ही नाम से लाइसेंस निर्गत किया जाना लोग सही नहीं मान रहे है. इससे प्रशासनिक सिद्धांत के मामले में हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का उल्लंघन होगा.

जिन्हें 60 साल की उम्र तक मिलेगा बॉडीगार्ड, वह भी ले रहे हैं हथियार का लाइसेंस

विगत चार से पांच डीएम के कार्यकाल में जिस तरह से सरकारी अधिकारी और कर्मियों को हथियार का लाइसेंस दिया गया है, उसके बाद सरकारी अधिकारियों और कर्मियों में हथियार के लाइसेंस के प्रति झुकाव को देखते हुए यह चर्चा आम हो गयी है कि अचानक कैमूर में अधिकारियों व कर्मियों को इतना अधिक सुरक्षा का खतरा कैसे पैदा हो गया है. इस बार डीएम के अलावा अधिकारी के रूप में लोकजीत कुमार सहित कई कर्मी को भी हथियार का लाइसेंस दिया गया है. हालांकि, इसके पहले भी डिप्टी कलेक्टर, एसडीम, डीसीएलआर से लेकर डाटा ऑपरेटर व चतुर्थ वर्गीय कर्मी को भी हथियार का लाइसेंस दिया गया है .जो स्पष्ट रूप से सरकारी कर्मियों के हथियार के लाइसेंस के प्रति बढ़ रहे झुकाव को दर्शा रहा है.

सरकारी बॉडीगार्ड होने का हवाला दे एसपी ने एसडीपीओ को लाइसेंस नहीं देने की की थी अनुशंसा

पूर्व डीएम सावन कुमार के कार्यकाल में यहां पर पदस्थापित एक एसडीपीओ- एसडीएम और डीसीएलआर ने हथियार के लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था. जब एसडीपीओ की लाइसेंस का आवेदन तत्कालीन एसपी ललित मोहन शर्मा के पास पहुंचा तो उन्होंने उनके आवेदन पर लिखा कि इन्हें 60 साल की उम्र तक सरकारी बॉडीगार्ड मिलेगा. ऐसे में इन्हें हथियार के लाइसेंस की कोई आवश्यकता नहीं है. उन्होंने उक्त एसडीपीओ को हथियार की लाइसेंस नहीं देने की अनुशंसा की थी. इसके बाद डीएम सावन कुमार ने किसी भी सरकारी अधिकारी या पुलिस के अधिकारी को हथियार का लाइसेंस नहीं दिया था नैतिकता का पालन करते हुए पूर्व के डीएम और एसपी ने इस जिले में हथियार के लाइसेंस को लेकर इस तरह के भी उदाहरण पेश किये थे.

बगैर किसी खतरे की स्टेटस सिंबल के लिए लोग ले रहे हैं लाइसेंस

जिले में हथियार का लाइसेंस लेने का प्रचलन दिन- प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. आलम यह हो गया है कि लोगों के पास हथियार का लाइसेंस होना उनके स्टेटस से जुड़ गया है. जबकि कई लोगों को सुरक्षा संबंधी कोई खतरा नहीं है. फिर भी जुगाड़ तंत्र से हथियार का लाइसेंस पाने के बाद समाज में अपने हथियार का दिखावा करते आमतौर पर नजर आ जाते हैं.

सुरक्षा से अधिक हर्ष फायरिंग में हो रहा है इस्तेमाल

हथियार का लाइसेंस लेने के बाद उक्त हथियार का इस्तेमाल सुरक्षा से अधिक हर्ष फायरिंग में किया जा रहा है. इसके कई उदाहरण कैमूर जिले में ही कई बार मिल चुके हैं .हर्ष फायरिंग के दौरान कई लोगों की जान भी जा चुकी है. लगातार हर्ष फायरिंग में जान जाने के बाद सरकार ने इसे लेकर कड़े नियम भी बनाये हैं. लेकिन इसके बावजूद हथियार का लाइसेंस लेने और दिखावा करने के साथ-साथ हर्ष फायरिंग के मामले आये दिन सामने आ ही रहे हैं, जो की स्पष्ट रूप से हथियार के लाइसेंस देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के लिए सोचने का विषय है.

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Author: Vikash Kumar

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