छात्रों से शुल्क लेकर पंजीयन नहीं कराने पर तत्कालीन प्रधानाध्यापक पर एफआइआर दर्ज
रामपुर प्रखंड के प्लस टू उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय सबार का मामला
# रामपुर प्रखंड के प्लस टू उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय सबार का मामला # एसपी ने छात्र-छात्राओं की शिकायत पर संबंधित एचएम पर प्राथमिकी दर्ज कराने का दिया था आदेश 25 से 30 छात्र-छात्राओं ने दिया संयुक्त आवेदन, करमचट थाने में दर्ज हुआ मामला रामपुर. स्थानीय प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत प्लस उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, सबार में इंटरमीडिएट के छात्रों से रजिस्ट्रेशन शुल्क लेने के बावजूद पंजीयन नहीं कराने के मामले में तत्कालीन प्रधानाध्यापक के खिलाफ बुधवार को प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. यह कार्रवाई एसपी हरिमोहन शुक्ला के निर्देश पर की गयी है. जनता दरबार में छात्रों द्वारा दिये गये आवेदन के चार दिन बाद करमचट थाने में बुधवार देर शाम केस दर्ज किया गया. गौरतलब है कि विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन प्रधानाध्यापक ददन राम ने प्रत्येक छात्र से 1200 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया, लेकिन इंटरमीडिएट में उनका पंजीयन नहीं कराया. इस संबंध में छात्रों ने करीब डेढ़ माह पूर्व प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तेजस्विनी आनंद को भी आवेदन देकर शिकायत की थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने ददन राम को विगत 22 दिसंबर को ही निलंबित कर दिया था. इसके बावजूद छात्रों ने बीते शनिवार को एसपी हरिमोहन शुक्ला की अध्यक्षता में करमचट थाने में आयोजित जनता दरबार में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी थी. छात्रों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ को देखते हुए एसपी ने मामले को गंभीरता से लिया व थानाध्यक्ष को तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था. बुधवार शाम सबार गांव निवासी बलिस्टर मल्लाह की पुत्री पुतुल कुमारी ने करमचट थाऐ में आवेदन दिया, जिस पर 25 से 30 छात्र-छात्राओं के हस्ताक्षर थे. आवेदन में बताया गया कि वर्ष 2026 में होने वाली इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षा से वे पंजीयन नहीं होने के कारण वंचित हो गये हैं. इसके बाद बुधवार देर शाम प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गयी. क्या है मामला छात्रों के अनुसार, विद्यालय में इंटर आर्ट्स में 80 व साइंस में 39 छात्र-छात्राएं नामांकित थे. 119 में से लगभग 100 से 110 छात्रों का पंजीयन नहीं हो पाया. रजिस्ट्रेशन के लिए छात्र महीनों तक विद्यालय, विभागीय कार्यालय व पटना तक दौड़ लगाते रहे, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला. पंजीयन नहीं होने से वे इंटर परीक्षा में शामिल नहीं हो पायेंगे, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होगा व वे दो साल पीछे हो जायेंगे. कोचिंग फीस, समय व मेहनत सब व्यर्थ हो गया है. नये प्रधानाध्यापक दिलीप भारती से जब इस संबंध में जानकारी ली गयी, तब छात्रों को पता चला कि पूर्व प्रधानाध्यापक ने उनका रजिस्ट्रेशन कराया ही नहीं था. क्या कहते हैं थानाध्यक्ष इस संबंध में करमचट थानाध्यक्ष पंकज कुमार पासवान ने बताया कि छात्रों के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. मामले की जांच की जा रही है व आरोपित तत्कालीन प्रधानाध्यापक की गिरफ्तारी के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है.
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