Kaimur News : पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार झमाझम बारिश के बाद करमचट डैम से पानी छोड़े जाने के कारण दुर्गावती नदी उफान पर है. बुधवार से नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है. इसके कारण दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. किसानों की सैकड़ों एकड़ धान की फसल पानी में डूब गयी है, वहीं कई प्रमुख सड़कों पर भी बाढ़ का पानी पहुंचने की स्थिति बन गयी है. दुर्गावती बाजार स्थित उच्च विद्यालय के परिसर में नदी का पानी प्रवेश कर जाने से पठन-पाठन भी प्रभावित हुआ है.
करमचट डैम से पानी छोड़े जाने के बाद बढ़ा नदी का जलस्तर
पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण करमचट डैम पानी से लबालब भर गया. जलस्तर बढ़ने के बाद डैम से दुर्गावती नदी में पानी छोड़ा गया. इसके बाद नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी शुरू हो गयी. बुधवार को प्रखंड के दक्षिणी हिस्से में स्थित खेतों में दूर-दूर तक बाढ़ का पानी दिखाई देने लगा. देखते ही देखते किसानों की सैकड़ों एकड़ धान की फसल पानी में डूब गयी.
दर्जनभर गांवों की फसल पर मंडराया संकट
दुर्गावती प्रखंड के डहला, सरियांव, गोरार, मछनहटा, चेहरियां, कुशहरियां, चोगड़ा, मनोहरपुर, खमीदौरा और धनिहारी समेत दर्जनभर गांवों के किसानों की फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ गयी है. किसानों का कहना है कि यदि खेतों में दो-चार दिन तक पानी जमा रहा, तो धान की फसल बर्बाद होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी.
कई सड़कों पर पहुंचा बाढ़ का पानी
बुधवार दोपहर तक दुर्गावती-ककरैत मार्ग पर चेहरियां बाजार के समीप सड़क तक पानी पहुंच गया. इसी तरह दुर्गावती-चैनपुर पथ पर चोगड़ा पुल के पास भी पानी सड़क के करीब पहुंच गया. डहला मोड़-मरहियां हाटा मार्ग पर खमीदौरा के समीप भी नदी का पानी सड़क पार करने की स्थिति में पहुंचने की आशंका बनी हुई है. जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण लोगों की चिंता बढ़ गयी है.
हाईस्कूल परिसर में घुसा नदी का पानी, पढ़ाई प्रभावित
दुर्गावती बाजार के समीप नदी तट पर स्थित उच्च विद्यालय के परिसर में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. विद्यालय परिसर में पानी भरने के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जलजमाव के कारण विद्यालय में पठन-पाठन प्रभावित हो गया है.
जलस्तर नहीं घटने से किसानों की बढ़ी चिंता
बुधवार को देर शाम तक दुर्गावती नदी का जलस्तर घटने के बजाय बढ़ाव पर रहा. लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी किनारे बसे गांवों और खेतों में रहने वाले किसानों की चिंता बढ़ गयी है. किसानों को आशंका है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा और डैम से पानी छोड़ा जाता रहा, तो बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है.
