Durgawati Reservoir Eco Tourism Kaimur : बिहार में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग ने हाल ही में 50 से अधिक नए पर्यटन स्थलों का चयन किया है, लेकिन कैमूर जिले की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना दुर्गावती जलाशय को इस सूची में जगह नहीं मिली. इसे लेकर स्थानीय लोगों और पर्यटन से जुड़े जानकारों में निराशा है. उनका कहना है कि प्राकृतिक सुंदरता, नौका विहार और प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी के कारण यह स्थल इको टूरिज्म की सभी संभावनाओं से भरपूर है.
Kaimur News : 49 करोड़ की योजना के बावजूद नहीं मिला स्थान
कैमूर वन प्रमंडल पिछले कई वर्षों से दुर्गावती जलाशय को इको टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है. पिछले वर्ष विभाग ने करीब 49 करोड़ रुपये की लागत से इको टूरिज्म पार्क विकसित करने की योजना तैयार की थी. प्रस्ताव में बर्ड सेंचुरी, नौका विहार, तितली पार्क, बुद्धा पार्क, हर्बल एवं स्पाइसी गार्डन, बच्चों के लिए ओपन प्ले एरिया और आधुनिक पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की योजना शामिल थी.
प्राकृतिक सुंदरता और प्रवासी पक्षियों का है अनूठा संगम
जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित दुर्गावती जलाशय तीन पहाड़ियों के बीच फैला हुआ है. यहां का विहंगम दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करता है. सर्दियों में हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले प्रवासी पक्षियों का कलरव इस जलाशय की खूबसूरती को और बढ़ा देता है. वन विभाग यहां बर्ड सेंचुरी विकसित करने की दिशा में भी पहल कर चुका है.
नौका विहार बना पर्यटकों की पहली पसंद
दुर्गावती जलाशय में वन विभाग की ओर से नौका विहार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. नए साल, छुट्टियों और पर्व-त्योहारों के दौरान यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. विशाल जलराशि, पहाड़ी वादियां और ठंडी हवाएं इस स्थान को प्राकृतिक पर्यटन का आकर्षक केंद्र बनाती हैं.
पर्यटकों के लिए पहुंचना भी है आसान
दुर्गावती जलाशय सड़क, रेल और हवाई मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है. वाराणसी, पटना, गया, औरंगाबाद और सासाराम जैसे प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. वहीं निकटवर्ती रेलवे स्टेशनों और वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे से भी यह स्थल सुगम है.
पर्यटन विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
स्थानीय लोगों का मानना है कि कैमूर को इको टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की दिशा में दुर्गावती जलाशय की अनदेखी उचित नहीं है. उनका कहना है कि यदि इस परियोजना को पर्यटन विभाग की योजनाओं में शामिल किया जाए तो यह न केवल कैमूर, बल्कि पूरे बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है.
