MP Sudhakar Singh : बिहार की बदहाली और पिछड़ेपन के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसकी कमजोर शिक्षा व्यवस्था है. जब तक बिहार के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और बेहतर शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक बिहार का देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा होना संभव नहीं.
उक्त बातें बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने गुड़िया विद्यालय के प्रांगण में शिक्षक दिवस के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही, कहा कि कुछ लोग चाहते हैं कि बिहार की पहचान मजदूर राज्य के रूप में ही बनी रहे, लेकिन बिहार को मजदूरों की आपूर्ति करने वाला नहीं, बल्कि शिक्षित, आत्मनिर्भर और रोजगार देने वाला राज्य बनाना होगा.
बिहार की शिक्षा मजबूत करने के लिए की थी कई मांगें
सांसद ने कहा कि वर्ष 2024 की जनगणना के अनुसार बिहार में स्नातक स्तर तक शिक्षा प्राप्त करने वालों की संख्या करीब पौने सात प्रतिशत थी, जबकि देश स्तर पर स्नातक की स्थित देखा जाय तो 13 प्रतिशत थी, मैंने बिहार की शिक्षा को और मजबूत करने को लेकर प्रखंड स्तर पर डिग्री कॉलेज खोलने की मांग की थी, जिसके बाद राज्य में 211 डिग्री कॉलेज तो खुले किंतु काॅलेजो में जिन विषयों के शिक्षक होने चाहिये वह नहीं है, यह स्थिति बताती है कि बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी बड़े बदलाव की जरूरत है.
चार चीजों में बदलाव के लिए उठाये थे सवाल
सांसद बनने के बाद बिहार के विकास और व्यवस्था में बदलाव के लिए मैंने महत्वपूर्ण चार चीजों में बदलाव के लिए सवाल उठाये थे, जिसमें शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन, किसानों को न्यूनतम आय की गारंटी देने के लिए कानून बने, स्वास्थ्य व्यवस्था में गुणवत्तापूर्ण सुधार के लिए एम्स जैसे बड़े अस्पतालों का निर्माण और बिहार में सार्वजनिक वित्त का सही जगहों पर जनहित में इस्तेमाल जैसे मुद्दे को उठाया था. यह काम मैंने दो वर्ष पूर्व बिहार के लिए किया जो मेरे सोशल एकाउंट पर आज भी मौजूद होगें.
उन्होंने कहा कि बिहार के विकास की शुरुआत स्कूल और कॉलेजों से होगी. मजबूत शिक्षा व्यवस्था से ही नई पीढ़ी को बेहतर रोजगार के अवसर मिलेंगे और राज्य से होने वाले बड़े पैमाने पर पलायन को रोका जा सकेगा. किसानों की आय सुनिश्चित करने के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने कहा कि बिहार के बच्चों को शिक्षित किये बिना बिहार की तस्वीर नहीं बदली जा सकती. शिक्षा के क्षेत्र में निर्णायक बदलाव के साथ कृषि, स्वास्थ्य और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में सुधार किया जाये, तभी बिहार विकास के राष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से अपनी जगह बना सकेगा.
