Kaimur News : कैमूर जिले के जिला मुख्यालय भभुआ और अनुमंडल मुख्यालय मोहनियां में बाईपास सड़क के अभाव का खामियाजा आम लोगों, व्यापारियों और यात्रियों को रोज भुगतना पड़ रहा है. शहरीकरण और वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच दोनों शहरों की मुख्य सड़कें जाम और अतिक्रमण की समस्या से जूझ रही हैं. बुधवार को दोपहर करीब एक बजे अखलासपुर बाईपास रोड से जेपी चौक और पटेल चौक तक भीषण जाम लगा रहा, जिसमें ट्रक, डंपर, स्कूल बस, निजी वाहन और सवारी गाड़ियां घंटों फंसी रहीं.
194 करोड़ की योजना चार साल बाद भी अधूरी
15 जनवरी 2022 को तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने करीब 194 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-219 पर मोहनियां से भभुआ, चैनपुर और चांद होते हुए उत्तर प्रदेश के चंदौली तक बाईपास सड़क निर्माण की मंजूरी दी थी. इस परियोजना का उद्देश्य शहरों के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम करना और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाना था. लेकिन घोषणा के चार साल बाद भी निर्माण कार्य अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है.
चांद और भभुआ में बनना है करीब 10 किलोमीटर बाईपास
परियोजना के तहत चांद क्षेत्र में 2.40 किलोमीटर और भभुआ क्षेत्र में 7.35 किलोमीटर लंबा बाईपास बनाया जाना है. हालांकि विभागीय स्वीकृति मिलने के बावजूद निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है. वहीं वाराणसी से कोलकाता तक प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेसवे का कैमूर में बनने वाला 52 किलोमीटर हिस्सा भी भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया के कारण रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है.
भारी वाहनों का दबाव बढ़ा, ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई
भभुआ और मोहनियां में बाईपास नहीं होने के कारण बाहर से आने वाले ट्रक, डंपर और अन्य भारी वाहन शहर के बीचोंबीच होकर गुजरते हैं. इसके साथ ही ई-रिक्शा, ऑटो, बाइक और चारपहिया वाहनों की बढ़ती संख्या से पूरे दिन जाम की स्थिति बनी रहती है. कुदरा और अखलासपुर बाईपास बनने के बावजूद वे अब घनी आबादी के बीच आ चुके हैं, जिससे उनकी उपयोगिता भी सीमित हो गई है.
अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग से बढ़ी मुश्किल
शहर के पुराना चौक, पश्चिम बाजार, एकता चौक, पटेल चौक और जेपी चौक जैसे प्रमुख इलाकों में अतिक्रमण तथा सड़क किनारे अवैध पार्किंग के कारण हर कुछ मिनट पर जाम लग रहा है. पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है. कई बार वाहन चालकों और राहगीरों के बीच विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है.
स्थायी समाधान की मांग तेज
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर ट्रैफिक और प्रशासनिक कार्रवाई से कुछ घंटों के लिए राहत जरूर मिलती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाता. नो-एंट्री के दौरान भी बस, ट्रक और ट्रैक्टर शहर में प्रवेश करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है. लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से बाईपास निर्माण में तेजी लाने तथा अतिक्रमण हटाकर ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की मांग की.
