लक्की ड्राॅ में सफारी जीतने का हवाला दे एससी-एसटी थानेदार से सवा लाख रुपये खाते में मंगवाये
साइबर क्राइम से जुड़े अपराधियों ने थानेदार को अपने जाल में फंसाया अब ठगों की तलाश में जुटे थानेदार
भभुआ : साइबर क्राइम से जुड़े अपराधियों से बचाने व आमलोगों को जागरूक करने की जवाबदेही या जिम्मेवारी जिनके ऊपर है, वह ही जब साइबर क्राइम से जुड़े अपराधियों के जाल में फंस जाये, तो क्या कहना. ऐसा ही एक मामला कैमूर जिले में सामने आया है. कैमूर जिले में एससी-एसटी के थानेदार राम प्रताप को सफारी व पैसे के लालच में सवा लाख का चूना लग चुका है. उक्त थानेदार द्वारा अपने साथ हुई इस ठगी के मामले की प्राथमिकी भी एससी-एसटी थाने में दर्ज करायी गयी है.
दरअसल, विगत छह अप्रैल को एससी-एसटी थानेदार राम प्रताप के मोबाइल पर फोन आया कि नाप-तौल कंपनी में लॉटरी निकली है, जिसमें उन्हें फर्स्ट प्राइज मिला है. इसमें उन्हें टाटा सफारी गाड़ी अथवा 12 लाख 40 हजार 148 रुपये मिलेंगे. उनसे फोन करनेवाले ने पूछा कि वह सफारी गाड़ी लेना पसंद करेंगे या पैसा. इधर से थानेदार ने कहा कि उन्हें नकद ही दे दीजिए. इस पर फोन करनेवाले ने कहा कि इसके लिए पहले आपको रजिस्ट्रेशन कराना होगा और रजिस्ट्रेशन के लिए एक बैंक खाते का नंबर दिया और उसमें छह हजार 450 रुपये डालने को कहा. थानेदार ने खाते में छह हजार 450 रुपये डाल दिये. इसके बाद फिर थानेदार महोदय को फोन कर कहा गया कि बैंकवाले इतनी बड़ी रकम का डेढ़ प्रतिशत कमीशन मांग रहे हैं. 18 हजार 600 रुपये और डालने पड़ेंगे. एक बार फिर थानेदार महोदय ने 18 हजार 600 रुपये सफारी व पैसे के लालच में उक्त खाते में डाल दिये. इसके बाद इसी तरह तीसरी बार 37200 व 62250 रुपये कर के कुल चार बार में एक लाख 24 हजार 500 रुपये साइबर क्राइम के जालसाजों ने उक्त थानेदार रामप्रताप सिंह से अपने खाते में डलवा लिये. इसके बाद एक बार फिर एक लाख 39 हजार रुपये डालने की बात कहने लगे, तब जाकर उन्हें अपने साथ जालसाजी व ठगी की आशंका हुई और खाते में रुपये डालने से मना कर दिया. इस बीच, उक्त जालसाजों द्वारा छह लाख 20 हजार 72 रुपये के दो चेक का फोटो खींच कर वाट्सएप के जरिये उक्त थानेदार को भेजा गया. जब उन्हें अपने साथ ठगी की बात सामने आयी, तो उन्होंने इसकी प्राथमिकी अपने ही एससी-एसटी थाने में दर्ज करायी. स्वयं साइबर क्राइम से जुड़े उक्त अपराधियों तक पहुंचने में जुट गये हैं. इस बाबत पूछे जाने पर थानेदार रामप्रताप ने बताया कि किसी भी कीमत पर उक्त अपराधियों को वह खोज निकालेंगे. उन्होंने कहा कि नाप-तौल से वह अक्सर ऑनलाइन खरीदारी करते थे और उसी टॉल फ्री नंबर से मैसेज व फोन आने के कारण वह उनके जाल में फंस गये.
