समस्या. 90% घरों को नहीं मिलता स्वच्छ पानी
फंड उपलब्ध, पर शहरवासियों के लिए नल का जल अब भी सपना
भभुआ सदर : प अगर यह गरमी शहर में ही बिताना चाहते हैं, तो पानी की किल्लत से लड़ने के लिएकमर कस लीजिए.इसका कारण यह है कि इस बार भी पानी की समस्या से निजात मिलने की कोई उम्मीद दूर-दूर तक नहीं दिख रही है.
मार्च के महीने में ही गरमी का तेवर देख कर लग रहा है कि आनेवाले दिन और भी मुश्किल भरे होंगे लेकिन चिंता की बात है कि शहर की 10 फीसदी आबादी तक भी पीएचइडी का शुद्ध पानी नहीं पहुंचता है. अधिकतर लोग शहर में लगे हैंडपंप या फिर घर में लगाये गये समर्सिबल पंप से पानी का जुगाड़ करते हैं.
मुख्यमंत्री के सात निश्चयों में हर घर नल का जल पहुंचाना भी है. लेकिन, लालफीताशाही के कारण फंड आवंटित होने के बावजूद इस वर्ष शहरवासियों के घरों में नल का जल संभवत: नहीं पहुंच पायेगा. बारिश व सर्दी में पानी की खपत कम होती है, इसलिए लोगों का काम चल गया लेकिन गरमी में तो पानी की खपत अधिक होती है. चिकित्सक भी अधिक से अधिक पानी पीने की सलाह देते हैं. ऐसे में लोगों को चापाकल के पानी का उपयोग करना पड़ेगा लेकिन चापाकल के पानी में आयरन, आर्सेनिक व अन्य हानिकारक रासायनिक की मात्रा अधिक है. आयरन से हाजमा कमजोर हो जाता है जबकि आर्सेनिक तो कैंसर लेकर आता है.
40 लाख गैलन पानी की होगी जरूरत
शहर में क्षेत्रफल बढ़ने के साथ-साथ आबादी भी काफी बढ़ गयी है. इसको देखते हुए पानी की डिमांड भी बढ़ गयी है. गरमी के मौसम में शहर को हर रोज 40 लाख गैलन पानी की जरूरत है, लेकिन पीएचइडी विभाग मात्र एक लाख गैलन पानी की सप्लाई कर पाता है. वह भी सुबह, शाम और दोपहर बिजली उपलब्ध होने पर. लेकिन, यह पानी शहर के महज 10 फीसदी लोगों की जरूरत को पूरा नहीं कर पाता है. दरअसल में शहर में लगभग 92 हजार लोग स्थायी निवासी हैं, जबकि 20 हजार लोगों का इस शहर में आना-जाना होता है.
पानी के नाम पर ‘जहर’ की सप्लाइ
वैसे पीएचइडी की तरफ से यह दावा किया जाता है कि उसकी ओर से सप्लाइ हो रहा पानी साफ है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि पीएचइडी का दावा हवाई है. विशेषज्ञों व स्थानीय लोगों ने कहा कि पीएचइडी की ओर से जिस पाइपलाइन से पानी की सप्लाइ की जा रही है, उसे वर्षों पहले बिछाया गया था. पाइपलाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गयी है. कई जगहों पर गंदे पानी की निकासी की पाइप पानी की सप्लाइ वाली पाइप के पास से गुजरती है. इस वजह से कई जगह पर पीने का पानी गंदा हो गया है.
