शराबबंदी के बाद पहली होली महिलाओं को भी रास आयी

भभुआ सदर : पूर्ण शराबंदी के बाद मनायी गयी पहली होली महिलाओं और युवतियों को खूब रास आयी और महिलाएं भी इस बार की होली का भरपूर मजा लेते गली मुहल्लों की सड़कों पर निकलते हुए एक दूसरे के साथ धमाचौकड़ी करते हुए एक दूसरे को रंग गुलाल लगाया. रविवार को पहली दफा ऐसा लग […]

भभुआ सदर : पूर्ण शराबंदी के बाद मनायी गयी पहली होली महिलाओं और युवतियों को खूब रास आयी और महिलाएं भी इस बार की होली का भरपूर मजा लेते गली मुहल्लों की सड़कों पर निकलते हुए एक दूसरे के साथ धमाचौकड़ी करते हुए एक दूसरे को रंग गुलाल लगाया.
रविवार को पहली दफा ऐसा लग रहा था कि महिलाएं खुल कर होली मना रही है, वे भी पुरूषों की तरह घर से निकलकर मुहल्ले में एक दूसरे के घर भी जाकर रंग गुलाल लगाने में पीछे नहीं रहीं.
शराबबंदी और पुलिस के कड़े रूख के चलते शायद उन्हें भी किसी तरह के हंगामे का डर नहीं था. गली मुहल्लों से होली खेलकर लौट रही वीआइपी कॉलोनी की रीना सिंह व रीता देवी आदि ने बताया कि इस बार वे लोग घर से होली पर निकली हैं और बिना किसी डर व भय के मुहल्ले के अपने परिचितों संग होली मनाया, साथ चल रही मीरा पाठक ने अनुभवों को बांटते हुए बताया कि वह 40 बसंत देख चुकी हैं, लेकिन पहली बार कही भी शराब पीकर हुड़दंग करनेवाले नहीं दिखे. उनका कहना था कि होली के दिन क्या होली के दो चार दिन पहले से ही शराब के नशे में लोग डूब कर हुल्लड़बाजी शुरू कर देते थे.
डर यह लगा रहता था कि कहीं इनकी मस्ती के चक्कर में घर के पुरुष भी न आ जाये. वहीं 65 वर्षीय वृद्ध महिला मालती देवी ने बताया कि होली ऐसा त्योहार है, जिसमें लोग खुलेआम शराब व अन्य नशा करते थे. उनके हाथ में एक सुबह से ही शराब की बोतल रहती थी और नशे में ही अश्लील गीतों पर डांस होती थी. लेकिन, शराबबंदी ने उन्हें चिंतामुक्त करते हुए गली-मुहल्लों की सड़कों पर होली खेलने का मौका दे दिया.

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