महिलाओं का महत्व समझें व उनके प्रति संवेदनशील हों : एसपी

भभुआ कार्यालय : कैमूर में एसपी के पद पर पदस्थापित महिला आइपीएस अधिकारी हरप्रीत कौर जिले की महिलाओं के लिए मिसाल बन गयी हैं. उनके कामकाज से सभी खास कर महिलाएं काफी प्रभावित हैं. चार अगस्त 2015 को उनकी तैनाती कैमूर में की गयी. इसके बाद उनके किये गये कामकाज ने लोगों काफी प्रभाव छोड़ा. […]

भभुआ कार्यालय : कैमूर में एसपी के पद पर पदस्थापित महिला आइपीएस अधिकारी हरप्रीत कौर जिले की महिलाओं के लिए मिसाल बन गयी हैं. उनके कामकाज से सभी खास कर महिलाएं काफी प्रभावित हैं.
चार अगस्त 2015 को उनकी तैनाती कैमूर में की गयी. इसके बाद उनके किये गये कामकाज ने लोगों काफी प्रभाव छोड़ा. बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान श्रीमती कौर को डीएम ने महिला दिवस पर बुके देकर सम्मानित किया. इस मौके पर एसपी हरप्रीत कौर ने कहा कि पुरुष महिलाओं का महत्व को समझे. जहां औरतों का सम्मान नहीं होता. वह समाज आगे नहीं बढ़ सकता. पुरुष महिलाओं के प्रति संवेदनशील रहें. महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है. औरत चाहे घर में काम करे या बाहर, उनका महत्व अपने जगह पर सबसे ज्यादा है.
एसपी हरप्रीत कौर के कामकाज से कैमूर में अपराध पर काफी हद तक लगाम लगी. जिले के दक्षिणी भाग पर जहां नक्सलियों का प्रभाव है, तो उत्तरी भाग जीटी रोड पर इंट्रीमाफियाओं ओवरलोडिंग के धंधेबाज व अपराधियों का दबदबा है. लेकिन, उक्त महिला एसपी ने कैमूर में अपने पदस्थापन के बाद से नक्सलियों, अपराधियों व धंधेबाजों पर लगाम लगाया है.
हरप्रीत कौर की पहली पोस्टिंग सितंबर 2011 में एएसपी भभुआ के पद पर कैमूर मेंही हुई थी. अपने छह महीने के कार्यकाल में उन्होंने बाइक चोरों, मनचलों एवं अपराधियों पर जोरदार कार्रवाई की थी. इसी बीच उन्हें अति नक्सल प्रभावित जिले जहानाबाद में अप्रैल 2012 में एसपी की कमान दी गयी. अपने एक साल के कार्यकाल में उन्होंने जहानाबाद में इनामी नक्सली अरविंद की पत्नी प्रभा देवी व एक और नक्सली को साढ़े 27 लाख लेवी के साथ गिरफ्तार किया था. इसके कुछ दिन बाद जहानाबाद जिले में ही प्रमोद शर्मा नामक नक्सली को दो लाख की लेवी एवं हथियार के साथ गिरफ्तार किया था. इसके बाद उनकी पोस्टिंग अप्रैल 2012 में बेगूसराय एसपी के रूप में कर दी गयी. बेगूसराय में एक बच्चे का अपहरण के बाद 10 लाख रुपये फिरौती की मांग की थी और परिवारवालों ने 10 लाख रुपये पुलिस को बगैर बताये अपहरणकर्ताओं को दे भी दिया था.
पीड़ित परिवार के बगैर किसी सहयोग के पुलिस ने वहां पांच अपहरणकर्ताओं को साढ़े पांच लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया था. कैमूर में नक्सलवाद के साथ-साथ इंट्रीमाफिया एवं ओवरलोडिंग के अवैध कारोबारियों पर लगाम लगाना सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन इस इम्तिहान में भी आइपीएस अधिकारी ने अपने मेहनत के दम पर कामयाबी हासिल की. अपने कार्यकाल में उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में साड़ी, कंबल, बच्चों के लिए स्कूल बैग, कलम-कॉपी वितरण के अलावे युवाओं को फिजिकल ट्रेनिंग, लड़कियों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण, बेरोजगार युवकों को ड्राइविंग का प्रशिक्षण देने जैसे कई काम किये हैं.

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