357 दिव्यांगता सर्टिफिकेट की जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आयी

अगस्त 2016 में गलत तरीके से दिव्यांगता पेंशन का लाभ लेनेवाले लोगों के जब्त किये गये थे प्रमाणपत्र मोहनिया सदर : सरकारी राशि कब तक गलत तरीके से दिव्यांग बने स्वस्थ लोगों को पेंशन के रुप में मिलती रहेगी? बीडीओ की रिपोर्ट पर वरीय पदाधिकारी ने कार्रवाई नहीं की है. हम बात कर रहे प्रखंड […]

अगस्त 2016 में गलत तरीके से दिव्यांगता पेंशन का लाभ लेनेवाले लोगों के जब्त किये गये थे प्रमाणपत्र
मोहनिया सदर : सरकारी राशि कब तक गलत तरीके से दिव्यांग बने स्वस्थ लोगों को पेंशन के रुप में मिलती रहेगी? बीडीओ की रिपोर्ट पर वरीय पदाधिकारी ने कार्रवाई नहीं की है. हम बात कर रहे प्रखंड के वैसे 357 दिव्यांग पेंशनरों की, जिनमें कई नेजांच के क्रम में बीडीओ अरुण सिंह को बताया था कि वे स्वस्थ हैं. इन लोगों ने दलालों के माध्यम से दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाया था.
कब शुरू हुई थी जांच: कुछ लोगों द्वारा गलत तरीके से दिव्यांगता पेंशन लेने की सूचना मिलने पर अगस्त 2016 में सभी दिव्यांगों के पेंशन वितरण पर रोक लगाते हुए बीडीओ ने अपने सामने दिव्यांगों की जांच कर पेंशन देना शुरू किया. आठ अगस्त 2016 को ऐसे 207 लोग सामने आये, जो दिव्यांग थे ही नहीं और पेंशन ले रहे थे. इन लोगों का दिव्यांगता प्रमाणपत्र जब्त कर लिया गया. इसके बाद जांच को गति देते हुए बीडीओ ने पांच सितंबर 2016 को फिर ऐसे ही 150 लोगों के सर्टिफिकेट को जब्त किया था. इस दौरान लगभग 700 पेंशनर बीडीओ के सामने जांच के लिए उपस्थित ही नहीं हुए.
कैसे स्वस्थ लोग बनते हैं दिव्यांग: जाली सर्टिफिकेट पर लाभ उठानेवाले एक व्यक्ति ने बताया कि दलाल फोटो स्टूडियो में ले जाते हैं और हाथ या पैर टेढ़ा कर फोटो खींचने के बाद कंप्यूटर पर इसे संपादित करते हैं. दलाल ऐसी सेटिंग रखते हैं कि मेडिकल बोर्ड के सामने जाना भी नही पड़ता और दिव्यांगता प्रमाणपत्र बन कर मिल जाता. इसके बदले किसी से 1000, तो किसी से 2000 या 2500 रुपये लिये जाते हैं.
जब्त 357 सर्टिफिकेट को जांच के लिए बीडीओ ने अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक को पत्र के साथ सौंपा था. लेकिन, जांच रिपोर्ट नहीं आयी. इसके बाद बीडीओ ने डीएम को भी पत्र लिख कर ऐसे लोगों की पेंशन भुगतान पर रोक लगाने की मांग की. लेकिन, इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया. इसके कुछ ही दिन बाद पेंशन की राशि लाभुकों के खाते में भेजने का आदेश जारी हुआ. इसका परिणाम यह हुआ कि आज भी स्वस्थ लोग गलत दिव्यांगता प्रमाणपत्र के सहारे फायदा उठा रहे हैं.

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