भभुआ सदर : खुले में शौच की जब भी बात होती है, तो लोग गांवों की तरफ उंगली उठा लेते हैं. लेकिन, हालिया हालात इससे कोसों दूर हैं. स्वच्छता अभियान के दो साल होने के बावजूद भभुआ शहर खुले में शौचमुक्त नहीं हो सका है. शहर के कई वार्ड व मुहल्लों में अब भी बड़ी संख्या में कई परिवार खुले में शौच को मजबूर हैं. प्रधानमंत्री ने वर्ष 2019 तक पूरे देश को ओडीएफ यानी खुले में शौचमुक्त बनाने की घोषणा की थी. लेकिन, भभुआ शहर में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्रत्येक घर में शौचालय निर्माण की मुहिम काफी धीमी है. शहर में नगर पर्षद ने आठ वार्डों को अब तक ओडीएफ घोषित किया है. लेकिन, अगर इन वार्डों का आज भी निरीक्षण किया जाये, तो यहां गलियों में लोग खुले में शौच करते मिल जायेंगे. हालांकि जिला प्रशासन ने खुले में शौच पर जुर्माना व जेल भेजे जाने का भी दबाव बना रखा है, पर इसका असर नहीं दिख रहा.
नौ दिन में चले ढाई कोस: नगर पर्षद के जिम्मे भभुआ शहर को खुले में शौचमुक्त करने काम है.शहर में कुल परिवारों की संख्या सात हजार 588 है. इसमें से छह हजार 145 परिवार के पास पहले से ही शौचालय उपलब्ध है. इस प्रकार पूरे भभुआ शहर को खुले में शौचमुक्त करने के लिए करीब 1500 शौचालय के निर्माण का लक्ष्य नगर पर्षद द्वारा निर्धारित किया गया है. लेकिन, अब तक महज 500 से भी कम शौचालय बनाये जा सके हैं. हालांकि नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी दीनानाथ सिंह का कहना है कि शहर के 366 लाभुकों को प्रथम किस्त की राशि और 215 लाभुकों को द्वितीय किश्त की राशि का भुगतान कर दिया गया है. लेकिन, इन लाभुकों में से भी अधिकतर का कहना है कि शौचालय के लिए सीट और गड्ढा खुदवा तो दिया गया, लेकिन राशि नहीं दी गयी.
ओडीएफ घोषित वार्ड भी खुले में शौचमुक्त नहीं
भभुआ शहर को ग्रीन सिटी के नाम से जाना जाता है. यहां आज भी विभिन्न मुहल्लों व इलाकों में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष व बच्चे खुले में शौच जाते हैं. नगर पर्षद के दावे पर गौर किया जाये, तो शहर के आठ वार्ड दो, चार, पांच, 11, 12, 13, 17 और 18 ओडीएफ घोषित किये जा चुके हैं. लेकिन, ओडीएफ घोषित इन वार्डों में आज भी कई गरीब परिवार खुले में शौच को मजबूर हैं. घरों में शौचालय नहीं होने की समस्या सबसे ज्यादा महिला वर्ग को पेश आती है. शहर का वार्ड 18 हो या फिर वार्ड 12 का चकबंदी रोड. इन स्थानों पर आज भी सर्वत्र गंदगी पसरी हुई देखी जा सकती है.
