अगर आप मछली मारने का शौक रखते हैं, तो आपका नगर पर्षद की लापारवाही से रामपुर कॉलोनी में नाले के पानी से बने तलाब के पास आपका स्वागत है. कम से शहर के पश्चिमी भाग में स्थित रामपुर कॉलोनी की ध्वस्त हो चुकी नालियां कमोबेश यही बयां करती हैं. यहां स्थिति यह हो चुकी है कि ध्वस्त नालों के जमा पानी से यहां झील का नजारा दिखता है, जो बरसात के मौसम में बाढ़ का रूप ले लेता है.
भभुआ( सदर) : शहर में नाले नालियों के निर्माण में बरती गयी अनियमितता का दंश करीब हर वार्ड के लोगों को भुगतना पड़ रहा है. नगर पर्षद की उदासीनता व ठेकेदारों द्वारा नाले-नालियों के निर्माण में बरती गयी घोर अनियमितता के कारण किसी भी वार्ड में बने नाले व नाली आज दुरुस्त नहीं है. इसके चलते वार्डों व मुहल्लों में रहनेवाले लोगों को काफी फजीहत झेलनी पड़ रही है.
ऐसा ही हाल शहर के वार्ड नं तीन व एक के बीच बसे सैकड़ों घरों वाली रामपुर कॉलोनी का है. यहां न तो नाले दुरुस्त है और न ही सड़क. नप द्वारा लाखों रुपये की लागत से भभुआ-चैनपुर मुख्य सड़क से अष्टभुजी चौक तक नाले का निर्माण कराया गया था, लेकिन ठेकेदार द्वारा नाली निर्माण मे बरती गयी अनियमितता के चलते बनने के साथ ही नाले ध्वस्त हो गये. आज स्थिती यह हो चुकी है की यह नाले पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं. अब जाम व ध्वस्त हो चुके नाले से पानी निकलने से रहा. इसलिए नाले से निकला गंदा पानी खाली पड़े स्थान पर तालाब के रूप में बदल गया है. कुछ पानी सड़क पर भी लगा रहता है. उसी नाले के पानी से कॉलोनी के लोग अपने घर को आते-जाते हैं.
स्थिति बरसात के मौसम में और भयावह हो जाती है, जब बारिश का पानी नाले के पानी के साथ मिल कर लोगों के घरों तक मे प्रवेश कर जाता है. रामपुर कॉलोनी में निवास करने वाले चंदन सिंह, गुड्डू सिंह, दीपक पांडेय आदि को पिछले वर्ष की बरसात का मंजर अब भी याद है, जब भारी बारिश के कारण उनके कमरों तक पानी प्रवेश कर गया था और तकरीबन दो दिनो तक उनके घरों में नाले का पानी जमा पड़ा था. चंदन का कहना है कि घर में घुसे पानी से उठते गंध से घर के लोग बीमार पड़ गये थे और उनका इलाज कराना पड़ा था.
लोगों का कहना है कि इस समस्या से कई बार नप के अधिकारियों से लेकर वार्ड पार्षद को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन किसी का भी ध्यान इस ओर नहीं है. लोगो का तो यहां तक कहना था कि अगर जनप्रतिनिधि व अधिकारी इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता है, तो मजबूरन सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
