भभुआ सदर : पिछले डेढ़ महीने से प्याज खरीदारों के आंखों से आंसू निकाल रहा है. 15 दिन पहले सरकार ने प्याज की कीमतों में काबू करने के लिए कई उपायों की घोषणा की थी. इनमें विदेशों से इसके आयात की बात भी शामिल थी.
फिलहाल जिले के लोकल बाजार पर सरकार के इन उपायों का कोई असर नहीं पड़ा है और प्याज की कीमतें अब भी 70 रुपये किलो के पार है. खास बात तो है कि इसका सहोदर भाई लहसुन भी भाव की ऐंठन बनाये हुए है. यहां प्याज खुदरा में 70 रुपये किलो बिक रहा है. वहीं, लहसुन 200 रुपये किलो पर लोगों के मुंह का स्वाद बिगाड़े हुए है.
इधर, कारोबारियों का कहना है कि सरकारी उपाय बेअसर रहने के बाद जब तक नयी फसल का आना शुरू नहीं होगा. भाव में कोई कमी नहीं आने वाली है. कारोबारियों का कहना है कि जिले में जो प्याज की उपज होती है. उसका सौदा मार्च तक हो जाता है. इसके बाद यहां प्याज की आवक बाहर के मंडियों से होती है.
अभी मांग की अपेक्षा प्याज की आमद भी कम हो रही है. विक्रेता मजीद का कहना है कि गत वर्षों में जब भी क्षेत्रीय उत्पादित प्याज का मंडी में आना कमजोर पड़ जाता था,तो इसकी पूर्ति बाहर की मंडियों से कर ली जाती थी. लेकिन, देश के अन्य बाहुल्य प्याज उत्पादित क्षेत्रों में बारिश की वजह से इसकी रोपाई प्रभावित हो गयी. इसके कारण पूरे देश में ही प्याज के भाव बढ़ गये. जब तक नयी फसल की आमद शुरू नहीं होगी भाव में गिरावट आने की उम्मीद कम है.
जिले में तो प्याज के बीज के अभी रोपण का कार्य शुरू हुआ है. हालांकि, विक्रेताओं का मानना है कि माह के अंत तक नासिक का प्याज आना शुरू होता है, तो भाव में कुछ गिरावट आयेगी. एक क्षेत्रीय किसान ने बताया कि खेतों में बारिश का पानी जमा रहने के कारण प्याज की फसल पर उसका प्रतिकूल असर पड़ा और प्याज की जगह बहुतेरे खेतिहरों ने मटर की खेती शुरू कर दी गयी है. इस कारण मंडी में प्याज की जगह मटर की आमद बढ़ गयी है.
