नया खुलासा, अविवाहित बेटियों के नाम पर भी हुई निकासी

जांच में 11 मामले पाये गये सही, प्रोत्साहन राशि में धालमेल करनेवालों पर दर्ज होगी एफआइआर तीन मामलों में जारी हुआ पुन: जांच का आदेश मोहनिया सदर : भरखर में अपात्र लोगों को दी गयी शौचालय के प्रोत्साहन राशि के मामले की सुनवाई गुरुवार को अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष शुरू हुई. इस […]

जांच में 11 मामले पाये गये सही, प्रोत्साहन राशि में धालमेल करनेवालों पर दर्ज होगी एफआइआर

तीन मामलों में जारी हुआ पुन: जांच का आदेश
मोहनिया सदर : भरखर में अपात्र लोगों को दी गयी शौचालय के प्रोत्साहन राशि के मामले की सुनवाई गुरुवार को अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष शुरू हुई. इस दौरान शिकायतकर्ता जनक सिंह व मोहनिया बीडीओ की तरफ से प्रखंड स्वच्छता समन्वयक आलोक कुमार उपस्थित थे. सभी साक्ष्यों को सुनने व कागजात को देखने के बाद अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी सुनील कुमार तिवारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मामले में अब तक 11 मामले सही पाये गये हैं, यह मामला बहुत गंभीर है. इसमें जो भी दोषी पाये जायेंगे, उन पर प्राथमिकी दर्ज होना तय है. चाहे वे मामले से जुड़े अधिकारी हों या कर्मी. साथ ही इस मामले से जुड़े तीन मामलों में पुन: जांच का आदेश जारी किया गया
गौरतलब है कि इस मामले को विगत 10 फरवरी को प्रभात खबर ने ”बिना तलाक के 28 पति-पत्नियों को दूसरे वार्डों में नाम दिखा कर किया गया प्रोत्साहन राशि का भुगतान” नामक शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद अपना गला फंसता देख प्रखंड प्रशासन ने रविवार को ही कुछ लोगों पर नोटिस जारी कर दो दिनों के अंदर 11 अपात्र लाभुकों से एक लाख 32 हजार की प्रोत्साहन राशि की रिकवरी करा लिया था. हालांकि, इस पूरे मामले की सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा जायेगा. अब देखना यह है कि इस मामले में किन-किन लोगों पर कार्रवाई होगी.
पिता व पुत्री को भी प्रोत्साहन राशि का भुगतान : भरखर में एक मामले की जांच अभी पूरी भी नहीं हो पा रही है कि दूसरा मामला सामने आ जा रहा है, यहां शौचालय की प्रोत्साहन राशि का किस तरह बंदरबाट किया गया है. इसका अनुमान आप खुद ही लगा सकते हैं. यहां एक ही घर में दो अविवाहित बेटियों के नाम पर जहां प्रोत्साहन राशि का भुगतान किये जाने का मामला उजागर हुआ है. वहीं, पिता व पुत्री को भी प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है. इतना ही नहीं वार्ड पांच में रामाशंकर प्रसाद केसरी की बेटी सिंपल कुमारी के नाम से भुगतान किया गया है.
जबकि, वार्ड पांच में 2016 की मतदाता सूची को देखा जाये, तो इनका नाम भी कहीं अंकित नहीं है. वार्ड पांच के भुगतान क्रमांक संख्या 16 पर देखा जाये, तो सपना कुमारी, पिता अजय कुमार सिंह व क्रमांक 24 पर श्वेता कुमारी, पिता अजय कुमार सिंह यानी एक ही पिता की दो पुत्रियों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है. क्रमांक 25 पर अनुराधा कुमारी को व उनके पिता राम नगीना साह को भी प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है. इसके अलावे क्रमांक 212 पर बिट्टू कुमार सिंह व उनके पिता विनोद कुमार सिंह दोनों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है. जबकि, उक्त बालक व बालिकाएं अवयस्क व अविवाहित है, जिनका नाम मतदाता सूची में भी अंकित नहीं है. जबकि, नियम के अनुसार उसी पुत्री को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जा सकता है, जो अपने पिता की एकलौती संतान हो और घर की मुखिया हो. लेकिन, यहां ऐसा कुछ भी नहीं है. फिर भी भुगतान का होना किस हद तक विधि सम्मत है. आप स्वत: समझ सकते हैं. ऐसा सिर्फ भरखर में ही नहीं बल्कि पूरे प्रखंड में है.
बोले बीडीओ
इस संबंध में बीडीओ अरुण सिंह ने कहा कि जियो टैगिंग से पहले से जिन लाभुकों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है, उसकी जांच के लिए दो सदस्यीय टीम का गठन किया गया है. उक्त टीम के जांच में जहां-जहां मामला गड़बड़ पाया जायेगा, उन सभी लाभुक के साथ-साथ सत्यापन कर भुगतान करानेवाले कर्मचारी पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी.
बोले पदाधिकारी
इस संबंध में अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि सुनवाई के क्रम में 11 मामले सही पाये गये हैं. तीन अन्य में जांच का पुन: आदेश दिया गया है. उक्त मामला बहुत गंभीर है. इस मामले के दोषियों पर एफआइआर दर्ज होना लगभग तय है. कार्रवाई के लिए डीएम साहेब को रिपोर्ट भेजी जायेगी.
बोले डीडीसी
अविवाहित बेटियों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किये जाने के संबंध में उप विकास आयुक्त कृष्णा प्रसाद गुप्ता ने कहा कि उसी बेटी को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जा सकता है, जो अपने पिता की एकलौती संतान हो व घर की मुखिया है. भरखर में वरीय उप समाहर्ता दुष्यंत कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है. जांच चल रही है, जो भी दोषी पाया जायेगा. उस पर कार्रवाई होना निश्चित है.

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