Jehanabad : जिले में इस साल टूटा धान रोपनी का रिकॉर्ड

जिले में इस साल हुई जोरदार बारिश के कारण किसानों ने धान की रिकॉर्ड रोपनी की है. जिले किसानों ने इस साल के लक्ष्य से अधिक धान की बुआई तो की ही धान की रोपनी में पिछले साल का भी रिकॉर्ड टूट गया है.

जहानाबाद. जिले में इस साल हुई जोरदार बारिश के कारण किसानों ने धान की रिकॉर्ड रोपनी की है. जिले किसानों ने इस साल के लक्ष्य से अधिक धान की बुआई तो की ही धान की रोपनी में पिछले साल का भी रिकॉर्ड टूट गया है. इस साल जिले में 102.77 प्रतिशत धान की रोपनी की गयी है. जो लक्ष्य से 2.77 प्रतिशत अधिक है. जिले में वर्ष 2025 में 49411.86 हेक्टर भूमि पर धान की रोपनी का लक्ष्य रखा गया था. जबकि इसके मुकाबले इस साल जिले में 50782.98 हेक्टेयर जमीन पर धान की रोपनी की गयी है. जिले में इस साल हुई अच्छी बारिश ने धान की बुआई में पिछले साल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है. पिछले साल जिले के 50006.88 हेक्टेयर जमीन पर धान की रोकने की गयी थी. जिला कृषि विभाग से प्राप्त इस आंकड़े के अनुसार इस साल पिछले साल के मुकाबले 776.1 हेक्टर अधिक जमीन पर धान की रोपनी की गयी है. इस साल के लक्ष्य और पिछले साल की रोपनी का रिकॉर्ड तोड़ने के कारण वर्ष 2025 में धान की बंपर उपज की उम्मीद की जा रही है. इसका सबसे ज्यादा श्रेय जिले में हुई अच्छी बारिश को दी जा रही है. पिछले महीने के पहले सप्ताह में बारिश नहीं होने के कारण जिले के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आयी थी किंतु पिछले सप्ताह और फिर उसके बाद हुई अच्छी बारिश ने एक बार फिर धान की फसल को नयी जान दे दी है. अभी भी एक दो दिन रुक कर बारिश हो जाने से जिले के किसान खुश है. इस साल जुलाई के महीने में बारिश में व्यवधान पड़ा था जिसके कारण इस वर्ष धान की रोपनी में दिक्कत पेश आ रही थी उस समय ऐसा लग रहा था कि इस साल धान की रोपनी का लक्ष्य पूरा नहीं हो पायेगा. जुलाई महीने के अंतिम सप्ताह को छोड़कर पूरे महीने सही ढंग से बारिश नहीं होने के कारण किसान मायूस हो चुके थे. 25 जुलाई तक जिले में मात्र 38 प्रतिशत भूमि पर ही धान की रोपनी हो सकी थी. जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई बारिश के बाद मायूस के किसानों के चेहरे पर फिर से खुशी लौट आई थी जिसके कारण महीने के अंतिम 6 दिनों में ही हुई बारिश के बाद धान रोपनी का आंकड़ा 38 से उछलकर 69 प्रतिशत पर जा पहुंचा था, फिर उसके बाद मात्र एक दिन में ही तीन प्रतिशत भूमि पर धनरोपनी का काम संपन्न हो गया. एक अगस्त को यह आंकड़ा 69 से उछलकर 72 प्रतिशत पर आ गया. इसके बाद करीब एक सप्ताह सही ढंग से बारिश नहीं हुई जिसके कारण रोपनी का काम फिर धीमा हो गया. किंतु अगस्त महीने के दूसरे सप्ताह में हुई जोरदार बारिश के बाद जिले के अधिकांश किसान इस काम में जोर-शोर से जुट गये. जिले में इस साल 49411 हेक्टेयर जमीन पर धान की रोपनी का लक्ष्य रखा गया था. इसके मुकाबले 21 अगस्त तक के आंकड़े के अनुसार जिले की 48536 सेक्टर भूमि पर धनरोपनी हो चुकी थी. अगस्त महीने के तीसरे सप्ताह तक जिले के 99 प्रतिशत खेतों में धनरोपनी का कार्य संपन्न हो चुका था. जबकि अंतिम सप्ताह में बचे खेतों में भी किसानो ने धनरोपनी के कार्य संपन्न कर लिया. इसके बाद अगस्त महीने के अंत तक इस साल शत प्रतिशत खेतों में धनरोपनी का कार्य पूरा हो गया. जिले में हुई जोरदार बारिश और इसके बाद झारखंड सहित अन्य राज्यों में भारी बारिश के कारण विभिन्न नदियों में पानी आने के कारण जिले की नदियों के अलावे ताल तलैया आहार पोखर और पईन में पानी भरा रहने से जो खेत पारित पड़ी हुई थी. उनमें भी धान की रोपनी कर ली गई. जो खेत पहले से ही तैयार थे और केवल पानी के अभाव में रोपनी नहीं हो पा रही थी. वैसे खेतों तो अगस्त माह में ही धनरोपनी का कार्य संपन्न हो गया. जिले के किसान अवधेश सिंह का कहना है कि इस साल बारिश ने बड़ी मेहरबानी की है. समय पर बारिश होने तथा नदी आहार पोखर तालाब और पाईन में पानी जमा हो जाने से धनरोपनी का कार्य काफी आसान हो गया. जुलाई महीने के प्रारंभ 3 सप्ताह में सही ढंग से बारिश नहीं होने के कारण ऐसा लग रहा था कि अब बची हुई रोपनी का काम करने के लिए मोटर पंप चलाना पड़ेगा लेकिन जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के पहले सप्ताह में हुई जोरदार बारिश ने पानी की समस्या दूर कर दी. अगर रोपनी के बाद भी बीच बीच में बारिश होती रहे तो इस साल बंपर पैदावार होने की संभावना जताई जा रही है.

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By MINTU KUMAR

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