जहानाबाद नगर.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को केंद्रीय बजट पेश करेंगी. ऐसे में सभी की निगाहें आम आदमी की चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार की रणनीति पर टिकी हैं. बढ़ती महंगाई, नौकरी की अनिश्चितताओं और डायरेक्ट टैक्स के बोझ के साथ आम आदमी खाद्य, आवास, शिक्षा और रोजगार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में राहत की उम्मीद कर रहा है.
आर्थिक मंदी और आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर हाई जीएसटी दरों ने मध्यम और निम्न आय वाले परिवारों के लिए जीवन को और भी कठिन बना दिया है. देश अपने वर्कफोर्स को मजबूत करने और ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर प्रतिस्पर्धा करने का प्रयास कर रहा है, इसलिए कौशल विकास, रोजगार सृजन और टैक्स रेशनलाइजेशन को बढ़ावा देने वाली नीतियां महत्वपूर्ण होंगी. यह बजट न केवल वित्तीय बोझ को कम करने की क्षमता रखता है, बल्कि अधिक समावेशी और विकास-संचालित अर्थव्यवस्था के लिए आधार तैयार करने की भी क्षमता रखता है. मध्यम वर्ग जहां आयकर में राहत, टैक्स स्लैब में बदलाव और होम लोन पर ब्याज छूट बढ़ाने, विकास, महंगाई नियंत्रण और सभी वर्गों के लिए बेहतर सामाजिक सुरक्षा व सुविधाएं की उम्मीद लगाये हुए है, वहीं किसान पीएम किसान की राशि बढ़ाने, खाद-बीज पर सब्सिडी जारी रखने और एमएसपी व सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने की मांग कर रहा है. महिलाएं उज्ज्वला जैसी योजनाओं का विस्तार, महिला उद्यमियों के लिए सस्ते लोन और कामकाजी महिलाओं के लिए टैक्स में राहत की उम्मीद लगाये बैठे है वही युवा वर्ग रोजगार के नए अवसर, स्टार्टअप्स को बढ़ावा और शिक्षा ऋण पर ब्याज दर कम करने की उम्मीद पाले हैं.
