डीएम ने 75 वर्ष पुरानी पांडुलिपि का किया अवलोकन
इस महत्वाकांक्षी मिशन का उद्देश्य प्राचीन एवं दुर्लभ पांडुलिपियों का संरक्षण, संवर्धन एवं डिजिटाइजेशन कर उन्हें सुरक्षित रखना है.
कुर्था. कला संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार के संयुक्त तत्वावधान में देशव्यापी स्तर पर ज्ञान भारतम् मिशन संचालित किया जा रहा है. इस महत्वाकांक्षी मिशन का उद्देश्य प्राचीन एवं दुर्लभ पांडुलिपियों का संरक्षण, संवर्धन एवं डिजिटाइजेशन कर उन्हें सुरक्षित रखना है, ताकि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियां उससे ज्ञान अर्जित कर सकें तथा शोध कार्यों में उसका उपयोग कर सकें. इसी क्रम में डीएम अमृषा बैंस के निर्देशन में पांडुलिपियों के सर्वेक्षण एवं संरक्षण के लिए एक समिति का गठन कर पूरे जिले में व्यापक अभियान चलाया जा रहा है. पांडुलिपि से अभिप्राय ऐसे हस्तलिखित दस्तावेजों से है, जो 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने हों तथा ताम्रपत्र, भोजपत्र, कागज, कपड़े आदि माध्यमों पर लिखे गए हों, पांडुलिपियों के संरक्षण, संवर्धन एवं डिजिटाइजेशन के उद्देश्य से कुर्था प्रखंड के ग्राम टाली का भ्रमण किया गया. इस दौरान उन्होंने ग्राम टाली निवासी अजगेंद्र कुमार के आवास पर जाकर उनके द्वारा संरक्षित पांडुलिपियों का निरीक्षण एवं अवलोकन किया. अजगेंद्र कुमार द्वारा लगभग 100 से अधिक पांडुलिपियों का संरक्षण अत्यंत समर्पण एवं जिम्मेदारी के साथ किया गया है, जो जिले की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है. निरीक्षण के क्रम में जिला पदाधिकारी ने पांडुलिपियों की स्थिति, उनके संरक्षण के उपायों एवं उनके ऐतिहासिक महत्व की जानकारी प्राप्त की तथा इस उत्कृष्ट कार्य केे लिए अजगेंद्र कुमार को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया. साथ ही इस कार्य में सहयोग देने वाले युगल किशोर पाठक एवं रंधीर पाठक को भी सम्मानित किया गया. इस अवसर पर डीएम ने उपस्थित ग्रामीणों एवं नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि पांडुलिपियां हमारी सांस्कृतिक पहचान एवं ऐतिहासिक धरोहर का महत्वपूर्ण आधार हैं. इनका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है.