जहानाबाद. बिहार में शराबबंदी कानून लागू किए जाने के बाद जिले के सदर अस्पताल में बड़े तामझाम के साथ नशा मुक्ति केंद्र खोला गया था ताकि जिले में नशा के एडिक्टेड नशेड़ियों की लत छुड़ाई जा सके. इसके लिए नशा मुक्ति केंद्र में कई बेड लगाये गये डॉक्टर नर्स सहित और स्टाफ की टीम तैयार की गई. शुरुआती दिनों में इस नशा मुक्ति केंद्र में नशा के शिकार एडिक्टेड लोगों को इलाज के लिए लाया भी गया. केंद्र में ऐसे मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज भी शुरू किया गया लेकिन वह बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं चला. शुरुआती दिनों में शराबबंदी के कुछ दिनों के बाद ऐन केन प्राकेन रूप से इन नशेडियों को शराब मिलने लगी जिसके बाद शराब न मिलने के कारण बीमार हुए लोग नशा मुक्ति केंद्र में आना बंद हो गया. किसी प्रकार केंद्र को दो वर्षों तक चलाया गया किंतु यहां एक भी मरीज के नहीं आने के कारण बाद में सदर अस्पताल में खोले गए इस नशा मुक्ति केंद्र को वर्ष 2018 में बंद कर दिया गया. इसके बाद जहानाबाद जिले में नशा मुक्ति केंद्र का अस्तित्व समाप्त हो गया. बिहार में 5 अप्रैल 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पूर्ण शराबबंदी कानून लागू की गई थी. इस कानून (बिहार उत्पाद और मद्यनिषेध अधिनियम, 2016) के तहत राज्य में शराब की बिक्री, खरीद, निर्माण, भंडारण, परिवहन और सेवन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गयी थी. यह कानून मुख्य रूप से महिलाओं की मांग पर लायी गयी थी. इस कानून की घोषणा 26 नवंबर 2015 को मुख्यमंत्री के द्वारा की गयी थी, जिसमें इस कानून को 1 अप्रैल 2016 से लागू कर शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी. हालांकि शराबबंदी कानून आधिकारिक रूप से 5 अप्रैल 2016 से लागू हुआ. इसी के बाद बिहार के प्रत्येक जिले की तरह नशे के शिकार लोगों को उनकी आदत से मुक्ति दिलाने के लिए जहानाबाद जिले में भी नया के सदर अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र खोला गया था. नशा मुक्ति केंद्र बंद किए जाने के बाद उस बिल्डिंग में पैथोलॉजी लैब डिपार्मेंट, एक्स-रे केंद्र और नॉन कम्युनिकेबल डिसीज (एनसीडी) की ओपीडी ऑफिस खोल दी गयी, तब से इस बिल्डिंग में यही तीनों केंद्र चल रहे हैं. जिले में नशा मुक्ति केंद्र का अस्तित्व खत्म हो चुका है. नशा मुक्ति केंद्र में काम करने वाले चिकित्सक, जीएनएम एएनएम और सारे स्टाफ का स्थानांतरण हो चुका है. वर्तमान में इसी कैंपस के एनसीडी में काम करने वाली जीएनएम अलका आर्य ने बताया कि वह एमसीडी में वर्ष 2018 के अक्टूबर महीने में आई थी उस समय नशा मुक्ति केंद्र बंद हो चुका था. हाल के वर्षों में सूखे नशे की लत जहानाबाद जिले में तेजी से फैली है. खासकर युवा वर्ग इस सूखे नशे की लत का शिकार हो रहे हैं जिसमें चरस, अफीम गांजा, हसिस और ब्राउन शुगर का इस्तेमाल झड़ने से हो रहा है. जहानाबाद शहर की हर मोहल्ले में इसके कारोबारी मिल जाते हैं जो स्कूल और कॉलेज जाने वाले किशोर तथा युवाओं को इसका लत लगाकर उन्हें नशे का शिकार बना देते हैं. एक बार आदत लग जाने पर ऐसे किशोर और युवा नशे के लिए तड़पने लगते हैं और नशे के उन कारोबारी से मुंह मांगी कीमत पर नशे के आइटम खरीद कर उसका प्रयोग करते हैं. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी सूखे नशे का यह कारोबार फल फूल रहा है. पुलिस की कई कार्रवाई में ऐसे धंधेबाज पकड़े भी गये हैं. बावजूद इसके इस सूखे नशे के कारोबार पर लगाम नहीं लगाया जा सका है.
माता-पिता को भी पता नहीं होता बेटे की इस लत के बारे में : जिले में सूखे नशे का कारोबार इस तरह संगठित रूप से चलाया जा रहा है कि इसके शिकार किशोर के माता-पिता को भी उनके बेटे के इस लत के आदी होने की खबर नहीं लग पाती है. जब तक उन्हें खबर लगते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. किशोर इस तरह नशे का आदी हो चुका होता है कि उसे नशे का लत छुड़ाना मुश्किल हो जाता है. मुहल्ले के गरीब तबके के बच्चे तो इसके लती बन ही रहे हैं, अच्छे भले घर के कॉन्वेंट और सीबीएसई स्कूल में जाने वाले लड़के भी इसके शिकार हो रहे हैं. ऐसे बच्चों को नशे की लत छुड़ाने के लिए जिले में नशा मुक्ति केंद्र की जरूरत महसूस की जा रही है.
पटना भेजना पड़ता है नशे के एडिक्टेड लोगों को : जहानाबाद जिले में नशा मुक्ति केंद्र बंद हो जाने के बाद नशे के शिकार और इसके एडिक्ट हो चुके किशोर युवा और वयस्क लोगों को नशे की लत छुड़ाने के लिए पटना भेजना पड़ता है. नशे के शिकार लोगों को इलाज के लिए जब सदर अस्पताल में लाया जाता है तो अस्पताल की ओपीडी के चिकित्सक उनकी प्रारंभिक चिकित्सा करते हैं लेकिन पूरी तरह नशे के शिकार और एडिक्टेड हो चुके लोगों का इलाज यहां नहीं हो पता है इसके लिए उन्हें सदर अस्पताल से नालंदा मेडिकल कॉलेज पटना भेज दिया जाता है.
क्या कहते हैं डीपीएमजिले में सदर अस्पताल परिसर में नशा मुक्ति केंद्र खोला गया था जहां नशे के शिकार लोगों को भर्ती कर इलाज किया जाता था. बाद में नशा मुक्ति केंद्र बंद हो गया. अब अस्पताल की ओपीडी में ही इसका इलाज किया जाता है. विशेष परिस्थिति में ऐसे लोगों को एनएमसीएच पटना भेजने का प्रावधान है.
खुर्शीद आलम, डीपीएम, जिला स्वास्थ्य समिति, जहानाबाद
