Patna Gaya Fourlane Accident: जहानाबाद जिले में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर जिला और पुलिस प्रशासन अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रहा है. विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग-22 और 33 सड़क हादसों के प्रमुख केंद्र बन गए हैं. पटना-गया फोरलेन सड़क बनने के बाद वाहनों की रफ्तार काफी बढ़ गई है, जिससे दुर्घटनाओं की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है.
जहानाबाद सड़क दुर्घटना में जा रही लोगों की जान
बीते कुछ दिनों में जिले में कई गंभीर सड़क हादसे हुए हैं. मखदुमपुर के मुससी पुल के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से एक महिला की मौत हो गई, जबकि उसका पति गंभीर रूप से घायल हो गया. नेर के पास बोलेरो दुर्घटना में एक युवक की जान चली गई और चार लोग घायल हुए. घोसी में सड़क हादसे में कृषि विभाग के एक कर्मी की मौत हो गई. 12 मई को एक ही दिन में तीन बड़ी दुर्घटनाओं में एक किशोरी की मौत हुई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.
पटना-गया राष्ट्रीय राजमार्ग पर हादसा, दो शिक्षक घायल
बुधवार को पटना-गया राष्ट्रीय राजमार्ग-22 के जहानाबाद शहरी बाइपास पर अज्ञात फोर व्हीलर की टक्कर से दो शिक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए. कत्या थाना क्षेत्र के कुंभवा निवासी आकाश कुमार और कड़ौना थाना क्षेत्र के मोकर निवासी मनोज पाठक बाइक से स्कूल जा रहे थे. दोनों मचला स्थित निजी सीबीएसई पीपीएम स्कूल में शिक्षक हैं. स्कूल की ओर मुड़ने के दौरान पीछे से आए एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी और चालक मौके से फरार हो गया. स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया.
एनएच-22 पर ब्लैक स्पॉट चिन्हित
एनएच-22 पर जहानाबाद और मखदुमपुर क्षेत्र के दो स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है. यहां फुट ओवरब्रिज निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है. वहीं एनएच-33 और अन्य प्रमुख सड़कों पर अब तक प्रभावी सर्वे कर ब्लैक स्पॉट की पहचान भी नहीं की गई है.
ब्लैक स्पॉट हाईवे की हर वजह से हर महीने छह लोगों की हो रही मौत
आंकड़ों के अनुसार जिले में हर महीने औसतन छह लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हो रही है, जबकि दर्जनों लोग घायल हो रहे हैं. अधिकांश हादसों के पीछे तेज रफ्तार, ओवरटेकिंग, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, शराब पीकर वाहन चलाना और लापरवाही प्रमुख कारण हैं. घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी चालक गति सीमा का पालन नहीं कर रहे हैं.
सुरक्षा इंतजामों की कमी भी बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क किनारे अतिक्रमण, खराब विजिबिलिटी, स्पीड ब्रेकर की कमी और पर्याप्त चेतावनी संकेतों का अभाव दुर्घटनाओं को बढ़ावा दे रहा है. शहर में नो-एंट्री लागू होने के बाद कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन ग्रामीण इलाकों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है. टेंपो और बाइक चालकों की लापरवाही, बसों का बीच सड़क पर रुकना और तेज रफ्तार परिचालन भी हादसों की बड़ी वजह बन रहे हैं.
पटना-गया राष्ट्रीय राजमार्ग पर हादसे रोकने को उठेंगे कदम : एसडीओ
अनुमंडल पदाधिकारी राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-22 पर सर्वे कर दो ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां फुट ओवरब्रिज निर्माण का प्रस्ताव एनएचएआई को भेजा गया है. उन्होंने कहा कि एनएच-33 सहित अन्य मार्गों पर भी ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जाएंगे. सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है. तेज रफ्तार वाहन चालकों पर जुर्माना लगाने और ड्राइविंग लाइसेंस की जांच की कार्रवाई भी की जा रही है.
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