Jehanabad News(संजय अनुराग): जिले के भेलावर थाना क्षेत्र अंतर्गत डेढ़सईया गांव में सोमवार की रात एक युवक की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद से जहानाबाद सदर अस्पताल में घटनाक्रम तेजी से बदलते रहे हैं. प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. विनोद कुमार सिंह द्वारा जहानाबाद के एसपी (SP) पर लगाए गए बदसलूकी के आरोपों के बाद मामला पूरी तरह गरमा गया है. इस बीच, एसपी अपराजित लोहान ने प्रेस वार्ता कर आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है. दूसरी ओर, अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और डॉक्टरों के बीच हुई सफल वार्ता के बाद सदर अस्पताल में ठप पड़ी ओपीडी सेवाएं दोबारा बहाल कर दी गई हैं.
“7 घंटे तक नहीं हुआ पोस्टमार्टम, नष्ट हो सकते थे सबूत” – एसपी
एसपी अपराजित लोहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर डॉक्टरों के आरोपों को सिरे से खारिज किया और अस्पताल प्रशासन पर ही गंभीर सवाल खड़े किए. एसपी ने बताया कि सोमवार की रात 8:00 बजे ही मृतक युवक के शव को सदर अस्पताल लाया गया था, लेकिन रात के 2:30 बजे तक उसका पोस्टमार्टम नहीं किया गया. 6 से 7 घंटे तक शव बाहर रखे रहने के कारण उसकी स्थिति खराब हो रही थी. एसपी के अनुसार, पोस्टमार्टम में इतनी लंबी देरी के कारण एविडेंस (कानूनी सबूत) नष्ट होने का खतरा था. जब मैंने प्रभारी सिविल सर्जन से देरी का कारण पूछा और कहा कि अगर पोस्टमार्टम नहीं करना है तो परिजनों को लिखकर दे दीजिए, तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि वे न तो परिजनों के सामने जाएंगे और न ही लिखकर देंगे, बल्कि शव को पीएमसीएच (PMCH) पटना ले जाने की बात कही. एसपी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई बदसलूकी नहीं की. बाहर 50-60 की संख्या में आक्रोशित परिजन खड़े थे, इसलिए वे प्रभारी सिविल सर्जन का बाजू पकड़कर केवल परिजनों के पास बातचीत के लिए ले गए थे.
एसपी ने यह भी कहा कि कानूनन फोरेंसिक डॉक्टर न होने पर कोई भी एमबीबीएस या सर्जन पोस्टमार्टम कर सकता है. उनके जाने के महज आधे घंटे के भीतर अस्पताल के सर्जन ने पोस्टमार्टम कर दिया. केवल सिर में फंसी गोली को बाहर निकालने के लिए शव को पीएमसीएच पटना रेफर किया गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीएमसीएच की रिपोर्ट में देरी के कारण सबूत नष्ट होने की बात सामने आई, तो दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी.
भाजपा नेता पर मारपीट और पुलिस पिकेट की मांग पर बोले कप्तान
अस्पताल में डॉक्टरों के साथ हुई कथित मारपीट और सुरक्षा के सवाल पर एसपी ने स्थिति स्पष्ट की. ज्ञात हो कि सोमवार की रात पोस्टमार्टम को लेकर हुए हंगामे के दौरान डॉक्टरों ने एक भाजपा नेता पर मारपीट का आरोप लगाया था. इस पर एसपी ने कहा कि रात करीब 2 बजे प्रभारी सिविल सर्जन का फोन उनके पास आया था, तब उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही थी. जब वे खुद अस्पताल पहुंचे, तब भी उन्हें किसी डॉक्टर के साथ मारपीट की जानकारी नहीं दी गई. फिर भी, यदि इस संबंध में कोई लिखित आवेदन आता है, तो पुलिस निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करेगी. डॉक्टरों द्वारा अस्पताल परिसर में स्थाई सुरक्षा के लिए पुलिस पिकेट की मांग पर एसपी ने कहा कि जैसे ही अस्पताल प्रशासन जगह उपलब्ध करा देगा, वहां तुरंत पुलिस पिकेट की व्यवस्था पूरी कर दी जाएगी.
SDO की मध्यस्थता के बाद डॉक्टरों का कार्य बहिष्कार खत्म
सदर अस्पताल में हंगामे और अधिकारियों से टकराव के बाद डॉक्टरों ने ओपीडी (OPD) कार्य का बहिष्कार कर दिया था, जिससे दूर-दराज से आए मरीज बेहाल हो रहे थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए जहानाबाद के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) राजीव रंजन सिन्हा तुरंत सदर अस्पताल पहुंचे. उन्होंने आक्रोशित डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मैराथन बैठक की. प्रशासनिक आश्वासन और सुरक्षा के वादे के बाद डॉक्टर काम पर लौटने को राजी हुए, जिसके बाद ओपीडी सेवा पूरी तरह सामान्य हो सकी.
