Jehanabad News: (अविनाश कुमार की रिपोर्ट) बिहार के शिक्षा विभाग में डिजिटल डेटा एंट्री की लापरवाही का एक ऐसा अजब-गजब मामला सामने आया है, जिसने एक गरीब महिला के परिवार को भुखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है. जहानाबाद जिले के रतनी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत श्रीबिगहा मध्य विद्यालय के मुख्य द्वार पर विद्यालय की रसोइया रेणु देवी सोमवार से अपने बकाया वेतन भुगतान और सेवा बहाली को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गई हैं.
पीड़ित रसोइया रेणु देवी ने बताया कि शिक्षा विभाग के पोर्टल पर डेटा अपलोड करने के दौरान भारी लापरवाही बरती गई. कंप्यूटर पर उनकी वास्तविक जन्मतिथि 1985 को गलती से बदलकर 1945 दर्ज कर दिया गया. इस तकनीकी और मानवीय चूक का नतीजा यह हुआ कि कागजों पर उनकी उम्र अचानक बढ़ गई और शिक्षा विभाग ने उन्हें ‘ओवरएज’ मानते हुए सेवा से सेवानिवृत्त घोषित कर दिया. इस बड़ी लापरवाही के कारण पिछले डेढ़ वर्ष से उनका मासिक मानदेय पूरी तरह से बंद है, जिससे उनका परिवार गहरे आर्थिक संकट में घिर गया है.
आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र देने के बाद भी नहीं हुआ सुधार
हड़ताल पर बैठी रेणु देवी ने रोते हुए बताया कि इस तकनीकी गड़बड़ी को सुधारने के लिए उन्होंने अपने पहचान पत्र, योगदान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक कानूनी दस्तावेज विभाग को समय पर सौंप दिए थे. इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों और बाबुओं की घोर उदासीनता के कारण डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी उनके सरकारी रिकॉर्ड और जन्मतिथि में सुधार नहीं किया जा सका.
उन्होंने बताया कि इस न्याय के लिए वे जिला मुख्यालय में जिलाधिकारी को भी लिखित आवेदन देकर गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. थक-हारकर उन्होंने अपने पूरे परिवार के साथ विद्यालय के मुख्य दरवाजे पर ही डेरा डाल दिया है. इस संबंध में शिक्षा विभाग के स्थापना व कार्यक्रम पदाधिकारी को भी आवेदन दिया गया है, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि गलत तरीके से उम्र बढ़ाकर जबरन सेवानिवृत्ति देने की इस कार्रवाई से वे मानसिक रूप से काफी आहत हैं.
पीड़िता की मुख्य मांगें:
- उम्र में सुधार: डिजिटल रिकॉर्ड में जन्मतिथि को सुधार कर वास्तविक उम्र 1985 दर्ज की जाए.
- बकाया मानदेय: पिछले 18 महीनों का रुका हुआ पूरा वेतन तुरंत जारी किया जाए.
- नियमित योगदान: जिला प्रशासन हस्तक्षेप कर विद्यालय में उनकी सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित कराए.
शिक्षक नेताओं का मिला समर्थन, मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
रसोइया के इस शांतिपूर्ण हड़ताल को स्थानीय ग्रामीणों और कर्मचारी यूनियनों का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है. सोमवार को विद्यालय की अन्य रसोइयों के साथ-साथ विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक सह प्रबुद्ध शिक्षक नेता राम उदय कुमार भी पीड़िता के समर्थन में इस सत्याग्रह में शामिल हुए.
समर्थन में उतरे शिक्षक नेताओं ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक गरीब रसोइया के वैधानिक दस्तावेजों को दरकिनार कर विभाग का यह रवैया पूरी तरह से संवेदनहीन है. रेणु देवी ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक विभाग अपनी गलती सुधार कर उनके बकाए मानदेय का एक-एक रुपया भुगतान नहीं कर देता, तब तक वे अपने पूरे परिवार के साथ स्कूल के मुख्य द्वार पर डटी रहेंगी और यह सत्याग्रह किसी भी कीमत पर वापस नहीं लिया जाएगा.
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