Jehanabad : साइबर अपराधियों का नया ट्रेंड, केस में मदद करने के नाम पर कर रहे हैं ठगी

जिले में इन दिनों साइबर ठगी का नया ट्रेड सामने आया है, जहां सक्रिय जालसाज गिरोह थाने में प्राथमिकी दर्ज करने वाले शिकायतकर्ता का ऑनलाइन मोबाइल नंबर निकाल कर केस में मदद करने के नाम पर ठगी का शिकार बनाने की कोशिश में जुटे हैं. मंगलवार को एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है,

जहानाबाद

. जिले में इन दिनों साइबर ठगी का नया ट्रेड सामने आया है, जहां सक्रिय जालसाज गिरोह थाने में प्राथमिकी दर्ज करने वाले शिकायतकर्ता का ऑनलाइन मोबाइल नंबर निकाल कर केस में मदद करने के नाम पर ठगी का शिकार बनाने की कोशिश में जुटे हैं. मंगलवार को एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है, जहां नगर थाना क्षेत्र के होरिलगंज के रहने वाले शोभा सिंह ने दो दिन पहले थाने में मुकदमा दर्ज करायी थी. प्राथमिकी दर्ज होने के दूसरे दिन शिकायतकर्ता के पति राजू कुमार के मोबाइल पर कॉल आता है और बताया जाता है कि हम एसपी ऑफिस से बोल रहे हैं. केस में मदद करना है तो बताये. मदद करने के नाम पर 3000 रुपये की डिमांड की जाती है. साथ ही जालसाज गिरोह द्वारा एक व्यक्ति का नंबर दिया जाता है. शिकायतकर्ता को उसी नंबर पर बात करने को कहा जाता है. हालांकि गनीमत यह रही कि जालसाज द्वारा दिये गये नंबर पर शिकायतकर्ता ने फोन लगाया, तो वह बंद बताया जिसमें उनकी जमा पूंजी बच गयी, नहीं तो वह साइबर जालसाज गिरोह के शिकार हो सकते थे और उनके खाते की जमा पूंजी गायब हो सकती थी. केस में मदद करने के नाम पर पैसे की डिमांड करने की जानकारी उन्होंने अपने मित्र को दी, तो उन्हें पता चला कि साइबर फ्रॉड गिरोह की कारस्तानी है, जो बातों में फंसा कर झांसे में लेते हुए आम लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं.

साइबर अपराधी ठगी करने के लिए कई तरह के अपनाते हैं हथकंडे : साइबर अपराधी शिकायतकर्ता को यह कहकर धोखा दे सकते हैं कि उन्हें किसी सरकारी योजना, सरकारी दस्तावेज़ या किसी अन्य महत्वपूर्ण सेवा की मदद करने के लिए पैसे की आवश्यकता है. यह एक सामान्य प्रकार की साइबर जालसाजी है, जिसे फिशिंग या मनी स्कैम कहा जाता है. जालसाज गिरोह इस तरह के जाल में फंसा कर पीड़ित से पैसे ऐंठते हैं.

फर्जी सहायता प्रस्ताव साइबर अपराधी फोन, इ-मेल या सोशल मीडिया के माध्यम से यह दावा कर सकते हैं कि वे किसी सरकारी योजना या अन्य प्रकार की सहायता देने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें “प्रोसेसिंग फीस ” या “ऑफिसियल शुल्क ” की आवश्यकता है. मूल्यवर्धन या एग्रीमेंट फीसकुछ जालसाज किसी वित्तीय या सरकारी एजेंसी के रूप में काम करने का दावा करते हैं और किसी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पैसे मांगते हैं.

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By Mintu kumar

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