जहानाबाद. राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था शब्दवीणा की कर्नाटक प्रदेश समिति द्वारा आयोजित मासिक काव्यगोष्ठी का आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ. कार्यक्रम में बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, झारखंड, नई दिल्ली, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों से आमंत्रित कवि-कवयित्रियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.
सरस्वती वंदना के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
काव्यगोष्ठी का शुभारंभ शब्दवीणा कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुनीता सैनी 'गुड्डी' ने सरस्वती वंदना से किया. कार्यक्रम का संयुक्त संचालन डॉ. सुनीता सैनी और प्रदेश उपाध्यक्ष विजयेंद्र सैनी ने किया, जबकि अध्यक्षता शब्दवीणा मथुरा जिला के सचिव एवं वरिष्ठ कवि फतेहपाल सिंह सारंग ने की.
साहित्य के प्रचार-प्रसार पर वक्ताओं ने रखा जोर
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल से पुरुषोत्तम तिवारी, मध्य प्रदेश से अरुण अपेक्षित, झारखंड से डॉ. विजय शंकर तथा बिहार से वरिष्ठ कवयित्री डॉ. रश्मि प्रियदर्शिनी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं. अतिथियों ने साहित्य के प्रचार-प्रसार में शब्दवीणा की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी साहित्यिक गोष्ठियां नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं. डॉ. रश्मि प्रियदर्शिनी ने कहा कि कविता समाज का दर्पण है और शब्दवीणा इस दर्पण को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रही है.
सावन, प्रेम और संवेदनाओं पर गूंजीं कविताएं
काव्यपाठ के दौरान सावन, प्रकृति, प्रेम और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित रचनाओं ने श्रोताओं का खूब मन मोह लिया. "मन बनके बादल-सा...", "नज़र दर्द-ए-दिल की जुबां हो गई है...", "आया सावन झूम के..." और "उमड़ते हैं, घुमड़ते हैं, बरसते क्यों नहीं बादल..." जैसी पंक्तियों पर श्रोताओं ने तालियों और दाद से कवियों का उत्साह बढ़ाया.
आभार के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुनीता सैनी ने सभी आमंत्रित कवियों, अतिथियों और साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि शब्दवीणा आगे भी देश के विभिन्न राज्यों में साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन कर साहित्य और संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास जारी रखेगी.
