Jahanabad News: (अशोक कुमार की रिपोर्ट)
देश सेवा के दौरान शनिवार को असम में हुए एक दर्दनाक विमान हादसे में जिले के हुलासगंज प्रखंड अंतर्गत बनवरिया गांव के वीर सपूत भारतीय वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार (25) शहीद हो गए थे. असम के जोरहाट वायुसेना स्टेशन पर भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी, जिसमे शुभम सहित पांच वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई थी. शहीद शुभम का शव रविवार शाम 4 बजे उसके पैतृक गांव बनवरिया आने वाला है.
दिया जायेगा गार्ड ऑफ ऑनर
बनवरिया स्थित हाई स्कूल मैदान में शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा. जहां गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा. करीब 1 घंटे तक पैतृक गांव में शव को अंतिम दर्शन के लिए रखे जाने के बाद उसे अंतिम संस्कार के लिए गयाजी ले जाया जाएगा. गयाजी स्थिति शमशान घाट पर शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा. जानकारी के अनुसार दोपहर 1:30 बजे शहीद जवान का शव एयरफोर्स के विमान से बिहटा एयरपोर्ट पहुंचेगी. जहां से शव को सड़क मार्ग से उसके पैतृक गांव लाया जाएगा. इस दौरान जगह-जगह पर शव के अंतिम दर्शन के लिए लोग एकत्रित होंगे जहां शव पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश के लिए शहीद हुए जवान को याद किया जाएगा.
जवान की शहादत से शोक में डूबे हैं ग्रामीण
फ्लाइट लेफ्टिनेंट की शहादत से जिले में शोक की लहर दौड़ गई. घर में मातम पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. गांव के लोग अपने लाल की शहादत पर गर्व भी कर रहे हैं और उसकी असामयिक मृत्यु से गहरे सदमे में भी हैं. गांव में हर तरफ शहीद जवान की चर्चा हो रही है हर कोई उसके मिलनसार व्यक्तित्व की चर्चा करते दिख रहे है.
किसान के बेटे ने मेहनत के दम पर हासिल किया था मुकाम
शुभम के पिता अमरेंद्र आनंद एक साधारण किसान हैं, जबकि माता गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों वाले परिवार से निकलकर शुभम ने अपनी प्रतिभा, लगन और कठिन परिश्रम के बल पर वर्ष 2021 में भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में चयन प्राप्त किया था. अपनी मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा के कारण उन्होंने कम समय में ही उत्कृष्ट पहचान बनाई थी.
देश सेवा को दी प्राथमिकता, शादी से किया था इंकार
परिजनों ने बताया कि घर में शुभम की शादी को लेकर चर्चा चल रही थी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान करियर और देश सेवा की जिम्मेदारियों पर है, यही कारण था कि उन्होंने विवाह का प्रस्ताव टाल दिया था.
मिलनसार स्वभाव के थे शुभम
गांव के लोगों के अनुसार शुभम बेहद सरल, विनम्र और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे. छुट्टियों में गांव आने पर वे सभी लोगों से आत्मीयता के साथ मिलते थे, उनकी सफलता और उपलब्धियों पर पूरे क्षेत्र को गर्व था. आज वही गांव अपने होनहार बेटे को खोने के दर्द से व्यथित है.फिलहाल शहीद के घर पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों का लगातार आना-जाना लगा हुआ है. पूरा गांव नम आंखों से अपने वीर सपूत के पार्थिव शरीर के पैतृक गांव पहुंचने का इंतजार कर रहा है.
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