जहानाबाद में साइबर सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम, डीएम और एसपी ने छात्रों को बताए डिजिटल ठगी से बचने के उपाय

Jehanabad Cybercrime Awareness: जहानाबाद पुलिस ने स्वामी सहजानंद महाविद्यालय में 'साइबर अपराध से बचाव के उपाय' विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया. जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने छात्रों को ऑनलाइन ठगी के बदलते तरीकों से आगाह किया और सतर्क रहने के गुर सिखाए.

Jehanabad Cybercrime Awareness: डिजिटल तकनीक के तीव्र विस्तार के साथ बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति समाज को जागरूक बनाने के उद्देश्य से जहानाबाद पुलिस के तत्वावधान में स्थानीय स्वामी सहजानंद महाविद्यालय में "साइबर अपराध से बचाव के उपाय" विषय पर एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को साइबर अपराधियों के बदलते तौर-तरीकों से अवगत कराते हुए सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक बनाना था.

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया ने अपने संबोधन में कहा कि आज का युग डिजिटल सुविधाओं का है, लेकिन इसके साथ अनेक चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं. उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी अब केवल तकनीकी हैकिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे लोगों की भावनाओं, विश्वास, लालच और जल्दबाजी का लाभ उठाकर आर्थिक ठगी को अंजाम दे रहे हैं. इसलिए डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ डिजिटल सतर्कता भी अत्यंत आवश्यक है.

लालच और जल्दबाजी बनती है साइबर ठगी का कारण

जिला पदाधिकारी ने अंग्रेजी की प्रसिद्ध कहावत "देयर इज नो फ्री लंच" का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना परिश्रम अत्यधिक लाभ, आकर्षक पुरस्कार, निःशुल्क उपहार अथवा कम समय में धन दोगुना होने जैसे प्रलोभन अक्सर साइबर अपराधियों के जाल होते हैं. उन्होंने किसी भी प्रस्ताव पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करने की सलाह दी.

पुलिस अधीक्षक कोटा किरण कुमार ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से साइबर ठगी के विभिन्न स्वरूपों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि फर्जी बैंक अधिकारी बनकर फोन करना, केवाईसी अपडेट के नाम पर जानकारी लेना, ओटीपी और यूपीआई पिन पूछना, क्यूआर कोड स्कैन कराकर खाते से पैसे निकालना, निवेश योजनाओं में असामान्य लाभ का लालच देना तथा नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करना साइबर अपराधियों के सामान्य हथकंडे बन चुके हैं.

ओटीपी और यूपीआई पिन किसी से साझा न करें

पुलिस उपाधीक्षक (साइबर अपराध) अंकित कुमार ने साइबर सुरक्षा के तकनीकी एवं व्यवहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी नंबर, यूपीआई पिन और इंटरनेट बैंकिंग के पासवर्ड को किसी भी परिस्थिति में किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए.

उन्होंने विद्यार्थियों को किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, अपरिचित व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई एप्लीकेशन डाउनलोड नहीं करने तथा पैसे प्राप्त करने के नाम पर क्यूआर कोड स्कैन नहीं करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि थोड़ी-सी सावधानी लाखों रुपये की संभावित आर्थिक क्षति से बचा सकती है.

ठगी होने पर तत्काल 1930 पर करें शिकायत

कार्यक्रम का विषय प्रवेश महिला थानाध्यक्ष अनामिका कुमारी ने किया. उन्होंने साइबर अपराधों के विभिन्न आयामों के साथ-साथ मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों के प्रति भी छात्र-छात्राओं को जागरूक किया. उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हो जाए तो घबराने के बजाय तत्काल अपने बैंक को सूचना देकर संबंधित खाते को सुरक्षित कराना चाहिए और बिना विलंब राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए. उन्होंने कहा कि समय पर शिकायत दर्ज होने से ठगी गई राशि वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है.

प्रश्नोत्तर सत्र रहा ज्ञानवर्धक

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई लेन-देन, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया सुरक्षा और साइबर अपराधों से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे. पुलिस उपाधीक्षक अंकित कुमार ने सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से सभी जिज्ञासाओं का समाधान किया.

कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) दीपक कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है. उन्होंने कहा कि जागरूक और सतर्क नागरिक ही साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं.

महाविद्यालय प्रशासन ने जहानाबाद पुलिस की इस जनोपयोगी पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया. कार्यक्रम में महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक सदस्यों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही.


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Author: Mritunjay Jehanabad

Published by: Nikhil Anurag

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