Sadar Hospital, Jehanabad : सदर अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टरों की ड्यूटी को लेकर एक बार फिर गंभीर लापरवाही सामने आई है. बुधवार को हंगामे के एक दिन बाद शुक्रवार को भी करीब डेढ़ घंटे तक इमरजेंसी डॉक्टर विहीन रही. इस दौरान कई मरीज इलाज के इंतजार में परेशान रहे. इनमें राष्ट्रीय जनता दल के जिला अध्यक्ष महेश ठाकुर के पुत्र और हुलासगंज इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र गौरव भी शामिल थे. गौरव को बेहोशी की हालत में हुलासगंज से सदर अस्पताल रेफर किया गया था.
ईसीजी में गड़बड़ी, डॉक्टर की तलाश में भटकते रहे परिजन
गौरव को करीब 4:20 बजे डॉ. एके नंदा ने देखा और ईसीजी कराने के साथ दवाएं लिखीं. इसके बाद करीब 4:30 बजे डॉ. नंदा इमरजेंसी से चले गए. गौरव के पिता महेश ठाकुर ईसीजी दिखाने और आगे के इलाज के लिए डॉक्टर को खोजते रहे, लेकिन इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं मिला. बाद में ईसीजी में भी गड़बड़ी पाए जाने की बात सामने आई.
अस्पताल से लेकर डीएम तक लगाते रहे फोन
महेश ठाकुर के अनुसार उन्होंने अस्पताल प्रबंधक, सिविल सर्जन और जिला पदाधिकारी को फोन कर स्थिति की जानकारी दी. उनका आरोप है कि सिविल सर्जन ने फोन नहीं उठाया. कई प्रयास के बाद डीएम से बात हुई. डीएम ने सिविल सर्जन को तत्काल सदर अस्पताल में डॉक्टर भेजकर इलाज शुरू कराने का निर्देश दिया. इसके कुछ देर बाद डॉ. नंदा इमरजेंसी में पहुंचे और मरीजों का इलाज शुरू किया.
बुखार और बेहोशी के मरीज भी करते रहे डॉक्टर का इंतजार
इस दौरान इमरजेंसी में बुखार से तप रहे मरीजों के अलावा बेहोशी और अन्य गंभीर स्थिति वाले मरीज भी इलाज के लिए पहुंचे थे. करीब डेढ़ घंटे तक डॉक्टर के नहीं रहने से मरीज और उनके परिजन परेशान रहे. घटना को लेकर अस्पताल परिसर में काफी हंगामा भी हुआ.
बुधवार को भी एक घंटे तक डॉक्टर नहीं थे
सदर अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टरों की गैरहाजिरी का यह दूसरा मामला है. इससे पहले बुधवार को भी दोपहर दो बजे से रात आठ बजे की शिफ्ट में करीब एक घंटे तक कोई डॉक्टर इमरजेंसी में मौजूद नहीं था. उस समय ड्यूटी पर तैनात एक डॉक्टर पोस्टमार्टम के लिए गए थे, जबकि दूसरे डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं आए थे. इस दौरान सांप काटने और हड्डी टूटने जैसे मामलों के मरीज भी इलाज के लिए डॉक्टर का इंतजार करते रहे.
दो डॉक्टरों की ड्यूटी, फिर भी एक ही रहता है मौजूद
अस्पताल में इमरजेंसी के लिए एक साथ दो डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है, लेकिन आरोप है कि दोनों डॉक्टर एक साथ ड्यूटी पर नहीं रहते. बताया जाता है कि आपसी सहमति से छह घंटे की ड्यूटी में तीन-तीन घंटे की जिम्मेदारी बांट ली जाती है. इससे ज्यादातर समय इमरजेंसी में एक ही डॉक्टर मौजूद रहता है.
डीएम और सिविल सर्जन के निरीक्षण में भी सामने आ चुकी है लापरवाही
डॉक्टरों के ड्यूटी से गायब रहने की शिकायत नई नहीं है. जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया के सदर अस्पताल के शुरुआती निरीक्षण के दौरान भी इमरजेंसी में एक ही डॉक्टर मौजूद मिले थे. बाद में सिविल सर्जन के निरीक्षण में भी डॉक्टर के ड्यूटी से गायब रहने की बात सामने आई थी. इसके बावजूद अब तक हुई कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. इससे डॉक्टरों के ड्यूटी से गायब रहने की समस्या जारी रहने का आरोप लगाया जा रहा है.
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन हरिश्चंद्र चौधरी ने बताया कि सदर अस्पताल की इमरजेंसी में कुछ देर तक डॉक्टर नहीं होने की सूचना उन्हें जिलाधिकारी से मिली थी. इसके बाद वह स्वयं सदर अस्पताल पहुंचे, तब तक डॉ. एके नंदा इमरजेंसी में लौट चुके थे. उन्होंने बताया कि डॉ. नंदा कुछ देर के लिए कहीं गए थे. वहीं, दूसरे डॉक्टर सुनील राय की ड्यूटी थी, लेकिन वे ड्यूटी पर नहीं आए. उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
