न्याय के लिए भटक रहे उपभोक्ता

आस. कोरम के अभाव में उपभोक्ता संरक्षण फोरम में नहीं हो रही सुनवाई सितंबर, 2015 से सदस्य तथा फरवरी, 2017 से अध्यक्ष का पद है रिक्त जहानाबाद नगर : उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण फोरम की स्थापना जिले में वर्षों पूर्व की गयी थी. अपने स्थापना काल की शुरुआत में फोरम द्वारा […]

आस. कोरम के अभाव में उपभोक्ता संरक्षण फोरम में नहीं हो रही सुनवाई

सितंबर, 2015 से सदस्य तथा फरवरी, 2017 से अध्यक्ष का पद है रिक्त
जहानाबाद नगर : उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण फोरम की स्थापना जिले में वर्षों पूर्व की गयी थी. अपने स्थापना काल की शुरुआत में फोरम द्वारा कई उपभोक्ताओं को न्याय दिलाया गया, जिससे उपभोक्ताओं को लगने लगा था कि अब उनके साथ अन्याय नहीं होगा. बल्कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए फोरम स्तर से कार्रवाई होगी. लेकिन सितंबर, 2015 से फोरम में सदस्य नहीं रहने के कारण कोरम पूरा नहीं हो रहा है.
ऐसे में फरवरी माह से अध्यक्ष के भी चले जाने से फोरम पूरी तरह ठप पड़ गया है.न्याय के लिए उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाते दिख रहे हैं, लेकिन कोरम के अभाव में उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है और न ही उनके मामलों की सुनवाई ही हो पा रही है. मालूम हो कि उपभोक्ता संरक्षण फोरम में प्रतिमाह 10 से 12 शिकायतें दर्ज करायी जाती हैं, लेकिन इन शिकायतों पर फिलहाल सुनवाई नहीं हो पा रही है. ऐसे में उपभोक्ता परेशान हैं. वहीं फोरम में कार्यरत कर्मी भी अध्यक्ष के नहीं रहने के कारण वेतन के लिए टकटकी लगाये हैं. 15 फरवरी से अध्यक्ष के चले जाने के बाद से कर्मियों को आवंटन के बावजूद भी वेतन नहीं मिल पाया है.
सेवा संबंधी कमी के आते हैं मामले : उपभोक्ता संरक्षण फोरम में वैसे उपभोक्ता अपनी शिकायत लेकर आते हैं, जिन्हें बेहतर सेवा नहीं मिल पाती है. विशेष कर बीमा कंपनी , बिजली विभाग ,बैंक ,चिकित्सक व दुकानदारों के खिलाफ शिकायतें आती हैं, जिनकी सुनवाई फोरम द्वारा की जाती है. हालांकि शिकायत के लिए यह जरूरी होता है उपभोक्ता के पास संबंधित मामलों का कैशमेमो उपलब्ध हो. उक्त कैशमेमो के अाधार पर ही यह देखा जाता है कि उपभोक्ता को सेवा में कमी हुई है.
सदस्य के अभाव में हो रही परेशानी
उपभोक्ता संरक्षण फोरम में सदस्य नहीं रहने के कारण अधिक परेशानी हो रही है. अध्यक्ष के लिए किसी जिले से इस जिले को टैग किया गया है, लेकिन जब तक सदस्य नहीं रहेंगे,तो कोरम पूरा नहीं होगा, तब तक मामलों की सुनवाई संभव नहीं है.
सकलदेव प्रसाद सिंह,प्रधान लिपिक

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