जहानाबाद (नगर) : विगत एक साल से अस्पताल में अपनी विकलांग मां के साथ जीवन गुजार रही खुशी (03 वर्ष) को आज उसका परिवार मिल गया. वह अपनी नानी के साथ चली गयी. एक वर्ष पूर्व खुशी को उसकी विकलांग मां प्रमीला देवी के साथ पिता जितेंद्र महतो ने ही इलाज के बहाने घर से लाकर जहानाबाद स्टेशन पर लावारिस हाल में छोड़ दिया था.
प्रमीला खुशी को गोद में लिये भटकते-भकटते सदर अस्पताल पहुंची तथा वहीं की होकर रह गयी. अस्पताल प्रशासन द्वारा मां-बेटी को भोजन व समय-समय पर कपड़े उपलब्ध कराये जाते रहे, ताकि उसका जीवन गुजर सके. विगत एक साल से अपनी मां के साथ अस्पताल परिसर में रहने से खुशी अस्पताल कर्मियों की चहेती बन गयी थी. वह अस्पताल के किसी भी वार्ड तथा कार्यालय में बेरोक-टोक घुस जाया करती थी. हर जगह उसे बिस्कुट व चॉकलेट मिल जाया करता था. इधर, अस्पताल प्रशासन प्रमीला देवी के घर वालों का पता लगाने में जुटा रहा. स्थानीय लोगों तथा अस्पताल प्रशासन के अथक प्रयास के बाद आखिरकार प्रमीला की ससुराल का पता चला, जो सीवान जिले के बसंतपुर थाने के भोपतपुर गांव में है.
स्थानीय लोग जब उसकी ससुराल पहुंचे, तो पति तो नहीं मिला, लेकिन उसके ससुर ने उसे रखने से इनकार कर दिया. वहीं, से उसके मायके की जानकारी हुई, जो छपरा जिले के मशरख थाने के करणखुदरिया गांव है. लोग जब उसके मायके पहुंचे, तो उसकी मां धनेशरी कुंवर से मुलाकात हुई. लोगों ने प्रमीला तथा उसकी बेटी खुशी की व्यथा सुनायी, तो धनेशरी देवी अपनी बेटी व नतिनी को लाने के लिए व्याकुल हो उठी.
आखिरकार शुक्रवार को धनेशरी देवी अस्पताल पहुंची तथा अपनी बेटी व नतिनी को साथ ले गयी. अस्पताल प्रशासन ने भी उदारता दिखाते हुए खुशी व प्रमीला को सहयोग के रूप में कपड़े व अन्य सामग्री देकर विदा किया.
