आखिर कब तक पूरी होगी आस

समस्या : अबतक 600 दुकानदारों का ही हुआ है बायोमीटरिक सर्वे शहर के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर फुटपाथी दुकानदारों का कब्जा है. उन्हें हटाने को लेकर कई बार प्रशासनिक अभियान चलाया गया. नोकझोक हुई लेकिन स्थायी तौर पर फुटपाथी दुकानदारों को दुकान उपलब्ध कराने की दिशा में कोई समुचित कार्रवाई अब तक नहीं हुई. परिणाम […]

समस्या : अबतक 600 दुकानदारों का ही हुआ है बायोमीटरिक सर्वे
शहर के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर फुटपाथी दुकानदारों का कब्जा है. उन्हें हटाने को लेकर कई बार प्रशासनिक अभियान चलाया
गया. नोकझोक हुई लेकिन स्थायी तौर पर फुटपाथी दुकानदारों को दुकान उपलब्ध कराने की दिशा में कोई समुचित कार्रवाई अब तक नहीं हुई. परिणाम यह है कि सड़क पर अतिक्रमण का साम्राज्य है. जिससे जाम की समस्या बनी है. मंगलवार को नगर परिषद में फुटपाथ दुकानदार संघ की होने वाली बैठक में शहर की इस ज्वलंत समस्या का हल निकलने के आसार है. दुकानदारों को रोजगार के लिए स्थायी तौर पर बसाने की पहल शुरू हो सकती है.
जहानाबाद. जिला मुख्यालय के लगभग सभी प्रमुख स्थानों पर फुटपाथी दुकानदारों के द्वारा प्रतिदिन दुकानें लगायी जाती है. ऐसे दुकानदारों की संख्या तकरीबन एक हजार है. नियमानुसार ऐसे दुकानदारों का बायोमीटरीक सर्वे करा कर वेंडर जोन बनाने का प्रावधान है लेकिन यह अब तक नहीं किया जा सका है. फुटपाथी दुकानदारों के द्वारा प्रमुख स्थानों पर सुबह से लेकर रात नौ बजे तक दुकानें सजा दिये जाने से भीड़ वाले इलाके में प्रतिदिन जाम की समस्या उभर रही है. एनएच के अलावा शहर के प्रमुख मार्गों पर दुकानें लगा दिये जाने से अतिक्रमण का बोलबाला है.
आये दिन ऐसी स्थिति में हंगामे मचते हैं. प्रशासन के द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाता है. लेकिन रोजगार की समस्या को लेकर दुकानदार फिर से अपनी दुकानें सड़कों पर लगा देते हैं. यह शहर की एक ज्वलंत समस्या है. जिसका निराकरण करने की दिशा में अबतक प्रशासन के स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. फुटपाथ दुकानदार संघ के द्वारा लगातार किये गये आंदोलन के पश्चात अब तक मात्र 600 दुकानदारों का ही बायोमीटरिक सर्वे हो पाया है.
नहीं बनाया गया हैं वेंडर जोन : प्रावधान के मुताबिक 100 दुकानदारों की संख्या पर एक वेंडर जोन बनाया जाना है. लेकिन अब तक यह काम शुरू ही नहीं हुआ है. खबर के अनुसार अब तक कराये गये सर्वें का काम भी अधूरा है. मात्र 600 दुकानदारों का ही सर्वें हुआ है. वेंडर जोन बनाये जाने पर फुटपाथी दुकानदारों को स्थायी तौर पर रोजगार करने के लिए दुकान आवंटित की जायेगी. उनके लिए शौचालय और पेयजल की भी व्यवस्था होगी. ऐसा हो जाने से एनएच पर दुकानें नहीं लगेगी. अतिक्रमण नहीं होने से जाम की समस्या का भी समाधान होगा. लेकिन इसमें विलंब होने से फुटपाथी दुकानदार निराश हैं वे आस लगाये बैठे हैं कि उनकी भी कोई सुने और वे स्थायी तौर पर अपना रोजगार स्थापित कर सकें.
उंटा-स्टेशन रोड में एनएच पर लगती है दुकान : शहर के कई प्रमुख स्थान ऐसे हैं जहां सुबह से ही दुकानें लग जाती है. सड़क पर दुकान लगाये जाने से आम लोगों को तो परेशानी होती ही है साथ ही साथ वाहनों के आवागमन होने से दुर्घटना की संभावना बनी रहती है. उंटा स्टेशन रोड में एनएच 83 पर इसका नजारा कभी भी देखा जा सकता है. एनएच का पश्चिमी भाग पूरी तरह फुटपाथी दुकानदारों के कब्जे में रहता है. कई बार यहां अतिक्रमण हटाओं अभियान चलाया गया. लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ. दुकानदारों का कहना है कि वे क्या करें. उन्हें रोजगार के लिए प्रशासन स्थायी तौर पर दुकान उपलब्ध करायें यहां पर हुई दुर्घटना में दो लोगों की मौत भी हो चुकी है और गुस्सायी भीड़ के द्वारा ट्रक जला दिया गया है.
अरवल मोड़, मलहचक मोड़ व राजाबाजार में भी अतिक्रमण का बोलबाला : उक्त तीनों स्थान शहर का अतिव्यस्त क्षेत्र है जहां प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है. शहर के अलावे ग्रामीण क्षेत्र से आये लोग खरीददारी करते हैं. सब्जी विक्रेताओं के अलावा ठेले पर विभिन्न तरह के सामान बेचने वाले अपनी दुकानें लगाते हैं. तीनों स्थान पर तीन तरफा दबाव बना रहता है. सड़क पर दुकानें लगा दिये जाने से सड़कें संकीर्ण हालत में हो जाती है. परिणाम यह होता है की छोटे बड़े वाहनों का गुजरना भी मुश्किल हो जाता है. और लग जाता है जाम जिसका खामियाजा भुगतना पड़ता है आम लोगों को.
जिप व नप की आवंटित दुकानों की हो जांच : शहर में जिला पर्षद और नगर परिषद की सैकड़ों दुकानें हैं. ये दुकान पैसे वालें लोगों के लिए आय का जरिया बना हुआ है. बताया जाता है कि लंबे समय से पैसे वाले लोग पैरवी, पहुंच और रुपये के बल पर सरकारी दुकानें अपने नाम से आवंटित करा ली है. वर्षों से किराया भी नहीं बढ़ाया गया है. और तो और इसमें अधिसंख्य वैसे लोग हैं.
जो सरकारी दुकान अपने नाम पर लेकर उसे किराया पर लगाये हुये हैं. जितना पैसा किराया के रूप में जिला पर्षद या नगर परिषद को दिया जाता है उससे चौगुणा किराये के रूप में लोग कमा रहे हैं. फुटपाथी दुकानदार संघ लंबे समय से ऐसे दुकानों की जांच कराने की मांग कर रहा है ताकि बाजिव हकदारों को इसका लाभ मिले. फुटपाथी दुकानदार भी इससे लाभांवित हो.
सड़कों पर दुकानें लगाये जाने से लग जाता है जाम
इन स्थानों पर लगायी जाती है दुकानें
काको मोड़
उंटा स्टेशन रोड़
मलहचक मोड़
अरवल मोड़
राजाबाजार
अस्पताल मोड़
बत्तीस भवंरिया
फीदाहुसैन मोड़
सट्टी मोड़
शिवाजी पथ
होगी पहल
फुटपाथी दुकानदारों को स्थायी तौर पर दुकान उपलब्ध कराने की दिशा में नगर परिषद प्रशासन सजग है. सर्वे का काम पूरा हो जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी. नगर परिषद के द्वारा निजी जमीन को पूरी तरह चिहिंत कर नये सिरे से दुकान बनाने की दिशा में पहल होगी.
संजीव कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद

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