पर्यटकों को लुभाती हैं वाणावर की वादियां

सावन में आते हैं लाखों सैलानी सतघरवा के नाम से चर्चित हैं गुफाएं मखदुमपुर (जहानाबाद) : जिले के ऐतिहासिक प्राकृतिक छटाओं से परिपूर्ण वाणावर की पहाड़ी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. सावन माह में लाखों की संख्या में सैलानी इन वादियों का आनंद लेने आते हैं. वाणावर की प्राकृतिक छटा, ऐतिहासिक व पुरातात्विक […]

सावन में आते हैं लाखों सैलानी

सतघरवा के नाम से चर्चित हैं गुफाएं
मखदुमपुर (जहानाबाद) : जिले के ऐतिहासिक प्राकृतिक छटाओं से परिपूर्ण वाणावर की पहाड़ी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. सावन माह में लाखों की संख्या में सैलानी इन वादियों का आनंद लेने आते हैं. वाणावर की प्राकृतिक छटा, ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व वाले गुफाएं पर्यटकों को आकर्षित करता है. पहाड़ी की चोटी पर स्थित बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर लोगों का आस्था का केंद्र है, जहां पूरे वर्ष जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. शिव पुराण के अनुसार, शिव के नवरूपों में बाबा सिद्धेश्वर नाथ का सर्वोच्च स्थान है. मान्यता है कि जो श्रद्धालु बाबा भोले नाथ पर जलाभिषेक करते हैं,
उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने इस पहाड़ी स्थल को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पहाड़ी इलाके में कई सुविधाएं बहाल की हैं, जिनमें पताल गंगा में रोपवे, पर्यटक थाना, पहाड़ी को जोड़ने वाले रास्तों में एलइडी लाइटें, पावर सब स्टेशन व मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियों का निर्माण कराया गया है. हालांकि रोपवे निर्माण का कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है. परंतु, कैबिनेट की मंजूरी पिछले वर्ष ही मिल गयी है. राज्य सरकार वाणावर पहाड़ी को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर लाने के लिए हर वर्ष वाणावर महोत्सव का आयोजन कर रही है. मखदुमपुर स्टेशन से नौ किमी पूरब स्थित वाणावर की पहाड़ी है, जहां सात गुफाएं हैं. इसे लोग सतघरवा के नाम से जानते हैं, जिसे पुराणों में सतघर कहा गया है. हालांकि ये सात गुफाएं पताल गंगा व नागार्जुन की पहाड़ियों में स्थित हैं.

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