जमुई के प्रख्यात साहित्यकार प्रो अवध किशोर प्रसाद का दिल्ली में निधन, 400 से अधिक रचनाएं हुईं प्रकाशित

जमुई के प्रख्यात साहित्यकार और शिक्षाविद प्रो. अवध किशोर प्रसाद का दिल्ली में निधन हो गया है. उन्होंने साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. उनकी 400 से अधिक रचनाएं और एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुईं.

जमुई जिले के चौरा अंतर्गत कुंधुर गांव निवासी प्रख्यात साहित्यकार एवं शिक्षाविद प्रो. अवध किशोर प्रसाद का दिल्ली में निधन हो गया. बीते बुधवार देर शाम उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर मिलते ही साहित्य जगत और जमुई जिले के साहित्यप्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गयी. साहित्य, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहे प्रो. प्रसाद के निधन को साहित्य जगत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है.

हिंदी विभागाध्यक्ष के रूप में दी सेवाएं

प्रो. अवध किशोर प्रसाद ने कोलफील्ड कॉलेज भागा, धनबाद और विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग में हिंदी विभागाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दीं. सेवानिवृत्ति के बाद भी साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र से उनका जुड़ाव बना रहा. वे इग्नू अध्ययन केंद्र, आईएसएम धनबाद में काउंसलर रहे. इसके अलावा जमुई के केकेएम कॉलेज स्थित इग्नू अध्ययन केंद्र में भी काउंसलर के रूप में अपनी सेवाएं दीं.

400 से अधिक रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित

साहित्य के क्षेत्र में प्रो. प्रसाद की सक्रियता व्यापक थी. कविता और गजल सहित साहित्य की विभिन्न विधाओं में उन्होंने लेखन किया. स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर की पत्र-पत्रिकाओं, संदर्भ ग्रंथों और विभिन्न साहित्यिक संकलनों में उनकी 400 से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुईं. उनकी रचनाओं में साहित्य के प्रति उनकी गहरी समझ और विविध विधाओं में लेखन की क्षमता दिखाई देती थी.

एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का किया लेखन

काव्य के क्षेत्र में 'शास्त्र और रूप' तथा 'दर्पण और रागबंध' जैसी कृतियां चर्चित रहीं. वहीं 'रेत के फूल' उनका चर्चित गजल संग्रह रहा. उन्होंने एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का लेखन किया. साहित्य के साथ शोध के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा.

तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने किया था सम्मानित

प्रो. अवध किशोर प्रसाद को साहित्य और शोध के क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था. प्राणनाथ वांग्मय पर महत्वपूर्ण कार्य के लिए प्राणनाथ मिशन, नई दिल्ली के तत्वावधान में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह द्वारा सम्मानित किया गया था. इसके अलावा उन्हें रंभा श्री सम्मान, महादेवी वर्मा सम्मान और रामधारी सिंह रजत स्मृति सम्मान सहित कई अन्य पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए.

साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने जताया शोक

प्रो. प्रसाद के निधन की खबर से साहित्यकारों, शिक्षाविदों और साहित्यप्रेमियों में शोक की लहर है. लोगों ने उनके निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की. साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए लोगों ने कहा कि उनकी रचनाएं और साहित्यिक कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए लंबे समय तक महत्वपूर्ण बने रहेंगे.

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लेखक के बारे में

By गुलशन कश्यप

गुलशन कश्यप प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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