बिहार की परंपरा, शौर्य व संस्कृति का संगम है माटी का बल दंगल : डीएम
बिहार की गौरवशाली लोक खेल परंपरा ''माटी का बल दंगल'' एक बार फिर अपनी मिट्टी की खुशबू और पहलवानों की दमखम के साथ जमुई में देखने को मिलेगी.
By PANKAJ KUMAR SINGH | Updated at :
जमुई . बिहार की गौरवशाली लोक खेल परंपरा ””माटी का बल दंगल”” एक बार फिर अपनी मिट्टी की खुशबू और पहलवानों की दमखम के साथ जमुई में देखने को मिलेगी. इस पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता को लेकर शुक्रवार को जिला पदाधिकारी श्री नवीन ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तृत जानकारी दी. जिलाधिकारी ने बताया कि दो दिवसीय माटी का बल दंगल प्रतियोगिता का उद्घाटन शनिवार को बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे, जबकि कार्यक्रम में बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहेंगी. इस प्रतियोगिता में राज्य के अलग-अलग जिलों से करीब 300 पहलवानों के भाग लेने की संभावना है. डीएम ने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले पहलवानों के ठहरने की समुचित व्यवस्था जिला प्रशासन ने गिद्धौर में की है. खिलाड़ियों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं.
चांदी की गदा बनेगी आकर्षण का केंद्र
डीएम ने बताया कि कुश्ती का पारंपरिक प्रतीक चांदी की गदा जिले में पहुंच चुकी है. इसे जिले के प्रमुख चौक-चौराहों पर प्रदर्शित किया जायेगा. साथ ही, कुछ प्रमुख प्रखंड मुख्यालयों में भी इसकी प्रदर्शनी लगायी जायेगी, ताकि आमजन में प्रतियोगिता को लेकर उत्साह और जागरूकता बढ़े.
श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम तैयार
डीएम ने बताया कि प्रतियोगिता के आयोजन के लिए श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम को पूरी तरह तैयार किया जा रहा है. अखाड़े की मिट्टी में हल्दी सहित पारंपरिक सामग्री मिलाकर शुक्रवार की शाम फाइनल टच दिया गया. प्रतियोगिता देर रात नौ बजे तक चलेगी. इसके लिए पर्याप्त लाइटिंग की व्यवस्था भी की जा रही है.
ग्रामीण संस्कृति व युवा शक्ति का मंच है प्रतियोगिता
डीएम ने कहा कि माटी का बल दंगल केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति, लोक परंपरा और शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम है. इस दंगल के जरिये युवाओं में अनुशासन, परिश्रम और भाईचारे की भावना विकसित होती है, वहीं स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी क्षमता दिखाने का बड़ा मंच मिलता है