बिजली न रहने से बोरिंग बेकार, गड्ढे से दूषित जल पीने को विवश ग्रामीण

गर्मी का मौसम शुरू होते ही सघन वन्य क्षेत्र में रहने वाले लोगों के समक्ष पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गयी है. बरहट प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है. खासकर घने जंगलों के बीच बसे नक्सल प्रभावित गुरमहा गांव में लोग शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं.

बरहट. गर्मी का मौसम शुरू होते ही सघन वन्य क्षेत्र में रहने वाले लोगों के समक्ष पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गयी है. बरहट प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है. खासकर घने जंगलों के बीच बसे नक्सल प्रभावित गुरमहा गांव में लोग शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं. सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही साफ झलक रही है. इससे यहां के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह गये हैं. बताते चलें कि गुरमहा गांव में कुल चार टोले हैं, जहां 700 से अधिक मतदाता और कुल मिलाकर लगभग 1000 से अधिक की आबादी निवास करती है. इसके बावजूद यहां बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव है. सरकार ने शिक्षा के लिए तो रोशनी जलायी, लेकिन गांव अब भी अंधेरे में डूबा हुआ है.

दूषित पानी पीने से बीमार होने का सताता है डर

ग्रामीण रमेश टुड्डू, बड़की मुर्मु, गीता सोरेन, सुरेश टुड्डू, राजेश हेंब्रम सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में एकमात्र बोरिंग की व्यवस्था की गयी थी. लेकिन बिजली रहने से बोरिंग में लगा मोटर बेकार पड़ा है. इस वजह से लोग गड्ढों और नदी के पानी पर निर्भर हैं. ग्रामीणों को हर सुबह और शाम नदी किनारे गड्ढा खोदकर पानी निकालना पड़ता है, जो अक्सर दूषित ही होता है. लोगों ने बताया कि गांव के लोग दूषित पानी पीने से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. लेकिन गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं न होने से उनका सही इलाज नहीं हो पा रहा है. यहां ग्रामीण चिकित्सक प्रत्येक दिन जाते हैं और उन्हें पौने दाम में लोगों का दवा देकर चले आते हैं, किंतु सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से पानी की समस्या बनी हुई है. हर साल गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है. गांव के लोग खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं, लेकिन पानी की किल्लत से उनकी आजीविका भी प्रभावित हो रही है.

वन विभाग की अनुमति नहीं मिलने से बनी है समस्या- बीडीओ

बीडीओ एसके पांडेय ने बताया कि गांव में बिजली की सुविधा नहीं होने से बोरिंग में लगा मोटर नहीं चल पा रहा है. बिजली पहुंचाने के लिए कई बार प्रयास किया गया, लेकिन वन विभाग की अनुमति नहीं मिलने से यह समस्या बनी हुई है. एसके पांडेय, बीडीओ

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By Prabhat Khabar News Desk

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