सड़क किनारे फेंकी गई जहर की गोली ने छीनी मासूम की जिंदगी

जिले के खैरा प्रखंड के गम्हरिया गांव में हुई एक दर्दनाक घटना ने जहरीले कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग और निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

खुले में पड़े सल्फास ने चार सहेलियों को बनाया शिकार, एक की मौत, तीन बच्चियां अस्पताल में भर्ती

जमुई.

जिले के खैरा प्रखंड के गम्हरिया गांव में हुई एक दर्दनाक घटना ने जहरीले कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग और निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सड़क किनारे लापरवाही से फेंकी गई सल्फास की गोली चार मासूम बच्चियों के हाथ लग गई. मासूमियत में उसे खाने के बाद एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चियां जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं. घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है ग्रामीणों का कहना है कि यदि जहरीले कीटनाशकों को खुले में नहीं छोड़ा जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था. लोगों ने प्रशासन से ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने और कीटनाशकों के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.

मासूमियत पर भारी पड़ी लापरवाही, बनी बड़ी त्रासदी

जानकारी के अनुसार गम्हरिया गांव की चार छात्राएं स्कूल से लौटने के बाद घास काटने के लिए बहियार गई थीं. इसी दौरान पुल के समीप उन्हें कागज में लिपटी एक गोली दिखाई दी. अनजान बच्चियों ने उसे खाने योग्य वस्तु समझ लिया और आपस में बांटकर खा लिया. कुछ घंटों बाद सभी की तबीयत बिगड़ने लगी परिजनों को जब पूरी जानकारी मिली तो उन्हें तत्काल सदर अस्पताल पहुंचाया गया था.

इलाज के दौरान नहीं बच सकी संजना

अस्पताल में चिकित्सकों ने सभी बच्चियों का इलाज शुरू किया, लेकिन 12 वर्षीय संजना कुमारी की हालत लगातार बिगड़ती गई. बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने के दौरान उसकी मौत हो गई. संजना की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है. गांव में हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर इतनी खतरनाक सामग्री खुले में कैसे पहुंची.

तीन बच्चियों की हालत अब भी चिंताजनक

घटना में प्रभावित भारती कुमारी, लवली कुमारी और शबनम कुमारी का इलाज चल रहा है. चिकित्सक उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. परिजन अस्पताल में डटे हुए हैं और बच्चियों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं.

बढ़ रही चिंता, जागरूकता की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में उपयोग होने वाले कीटनाशकों और जहरीले पदार्थों को लेकर जागरूकता की कमी है. खेतों और सड़कों के किनारे ऐसे पदार्थों को फेंकना बड़े हादसों को जन्म दे सकता है. यह घटना अभिभावकों, किसानों और प्रशासन सभी के लिए एक चेतावनी है कि जहरीले रसायनों के भंडारण और निस्तारण में जरा सी लापरवाही भी किसी परिवार की खुशियां छीन सकती है.

सवाल जिनका जवाब जरूरी

– सड़क किनारे सल्फास की गोली किसने फेंकी?

– जहरीले कीटनाशकों के निस्तारण की व्यवस्था क्यों नहीं?

– ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा और जागरूकता अभियान कब चलेंगे?

– बच्चों की पहुंच से दूर रखने के नियमों का पालन कौन सुनिश्चित करेगा?

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