जमुई. राज्य सरकार की ओर से बर्न मरीजों के समुचित उपचार को लेकर सदर अस्पताल के उपरी तल पर बर्न वार्ड बनाया गया, ताकि बर्न वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जा सके. अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही व गैर जिम्मेदाराना कार्य से बर्न वार्ड एक सामान्य वार्ड बनकर रह गया है. इस वार्ड में मरीजों को जो सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए उन सुविधाओं का एक फीसदी भी लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है या यूं कहें की अस्पताल प्रबंधन बर्न वार्ड के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है.
मामला शुक्रवार की देर रात उस समय सामने आया, जब नगर परिषद क्षेत्र के थाना चौक मुहल्ला में गैस सिलिंडर लीक होने से लगी आग के कारण एक ही परिवार के तीन लोग झुलस गये. इसमें एक बच्ची भी है. घायलों को सदर अस्पताल लाया गया जहां इमरजेंसी कक्ष में ड्यूटी पर मौजूद डॉ घनश्याम कुमार सुमन ने इलाज किया गया. इसके उपरांत जब परिजन बर्न के मरीज को वार्ड में शिफ्ट करने गये तो देखा उक्त वार्ड में मच्छरदानी के अलावा कोई और व्यवस्था नहीं है. इसके उपरांत परिजन घायल को लेकर अपने घर चले गये. परिजन द्वारा बताया गया कि घर में एसी लगा हुआ है और जले हुए मरीजों को एसी में रखा जाता है. लेकिन सदर अस्पताल में बर्न के मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. रातभर घर में रखने के बाद शनिवार की सुबह किसी निजी क्लिनिक में भर्ती करवाया जायेगा.वहीं शनिवार की सुबह बरहट थाना क्षेत्र के नूमर गांव में गर्म पानी से एक नौ माह की मासूम झुलस गयी, जिसे सदर अस्पताल लाया गया. यहां प्राथमिक उपचार के बाद परिजनों ने मासूम को निजी क्लिनिक में भर्ती करवाया. मासूम के परिजन ने भी बताया कि बर्न के मरीज को भर्ती करने की कोई सुविधा सदर अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, सिर्फ वार्ड बना दिया गया है. प्रभात खबर के प्रतिनिधि ने जब सदर अस्पताल के बर्न वार्ड का जायजा लिया गया तो पता चला कि बर्न वार्ड में सामान्य वार्ड की ही तरह सुविधा है. इस वार्ड में भर्ती मरीजों को एसी समेत अन्य सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है. सुविधा के नाम पर सिर्फ अस्पताल प्रबंधन द्वारा मच्छरदानी दी जा रही है. इस वार्ड में भर्ती मरीजों के देखभाल के लिए अलग से कोई चिकित्सक तथा स्वास्थ्य कर्मी की नियुक्ति नहीं की गयी है. जनरल वार्ड में प्रतिनियुक्ति स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा मरीजों की देखभाल के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है.
भर्ती मरीजों की परिजन खुद करते हैं ड्रेसिंग और साफ-सफाई:
दो माह से बर्न वार्ड में जिले के अलग-अलग क्षेत्र से दो महिला मरीज भर्ती हैं. मरीज के परिजन द्वारा बताया गया कि हम लोग अपने घर से कूलर लाये है, तब जाकर मरीज को कुछ राहत मिल रही है. मरीजों की ड्रेसिंग और साफ-सफाई खुद करनी पड़ती है. जेनरल वार्ड में ड्यूटी पर प्रतिनियुक्त स्वास्थ्य कर्मियों को घंटों मिन्नत करने के बाद आते है, और केवल खानापूर्ति कर चले जाते हैं. बताया जाता है कि बर्न वार्ड में कभी भी एसी नहीं लगाया गया है. इस कारण अधिकांश बर्न के मरीज को परिजन निजी क्लिनिक लेते जाते हैं, और जो निजी क्लिनिक जाने में सक्षम नहीं हैं. वे सदर अस्पताल के बर्न वार्ड में रहने को मजबूर हैं. बताते चलें कि राज्य सरकार द्वारा सदर अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर नित्य नये प्रयास करते हुए मिशन-60 और मिशन क्वालिटी चलाया गया. इसके तहत सदर अस्पताल को हाईटेक बनाने का कवायद शुरू की गयी थी. लेकिन जमुई सदर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण आये दिन मरीज और उनके परिजन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.कहते हैं अस्पताल प्रबंधक:
सदर अस्पताल के प्रबंधक रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि बर्न वार्ड में एसी लगाने को लेकर वरीय पदाधिकारी को पत्र लिखा गया है. वरीय पदाधिकारी के निर्देश के बाद जल्द ही बर्न वार्ड में एसी लगा दिया जायेगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
