लेह-लद्दाख की कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा में तैनात प्रखंड क्षेत्र के खरडीह गांव निवासी जवान मनीर अंसारी ड्यूटी के दौरान हुए हादसे में जिंदगी की जंग हार गए. करीब 26 वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद शनिवार की देर शाम उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा तो हर आंख नम हो गई. मनीर अंसारी भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) में स्टोर कीपर के पद पर लेह-लद्दाख में तैनात थे. ड्यूटी के दौरान रोड कटर मशीन की चपेट में आने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे. आर्मी अस्पताल में उपचार और ऑपरेशन के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.
एक फोन कॉल ने बदल दी परिवार की दुनिया
3 सितंबर की शाम मनीर की पत्नी फरहीन सदफ के मोबाइल पर सेना के एक सूबेदार का फोन आया. परिवार को बताया गया कि ड्यूटी के दौरान हादसे में मनीर घायल हो गए हैं और आर्मी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है. हादसे की खबर से परिवार चिंतित हो गया, लेकिन सभी को उम्मीद थी कि इलाज के बाद मनीर ठीक होकर घर लौट आएंगे. अगले दिन सुबह आया फोन परिवार की उम्मीदों को मातम में बदल गया. उपचार के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मनीर की मौत हो गई. पति की मौत की खबर सुनते ही पत्नी फरहीन सदफ बेसुध हो गईं. 19 वर्षीय बेटी आलिया परवीन और 15 वर्षीय बेटे मोहम्मद अरसलान अंसारी का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया.
जिस मशीन को उतार रहे थे, वही बनी मौत का कारण
बताया गया कि ड्यूटी के दौरान रोड कटर मशीन को एक फट्टे की मदद से वाहन से उतारा जा रहा था. इसी दौरान फट्टा खिसक गया और मशीन अनियंत्रित होकर पलट गई. मशीन मनीर के पैर पर गिर गई. गंभीर रूप से घायल मनीर को तत्काल आर्मी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन किया. परिवार इलाज सफल होने की प्रार्थना करता रहा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था.
2000 में शुरू हुआ देशसेवा का सफर
मनीर अंसारी ने वर्ष 2000 में सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सफर शुरू किया था. करीब 26 वर्षों तक उन्होंने देश के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाई. सेवा के अंतिम दौर में वे लेह-लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में तैनात थे. शनिवार देर रात उनका पार्थिव शरीर खरडीह पहुंचा तो गांव में मातम पसर गया.
राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
रविवार सुबह नमाज के बाद पुलिस जवानों की ओर से मनीर अंसारी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. इस दौरान बीडीओ अतुल प्रसाद, पुलिस निरीक्षक स्वयं प्रभा, थानाध्यक्ष विकास कुमार समेत पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. जवानों ने सलामी देकर देश के इस सपूत को अंतिम सम्मान दिया. इसके बाद मनीर अंसारी को कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किया गया.
गांव के बेटे को अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब
अंतिम यात्रा में खरडीह के अलावा आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. अंतिम दर्शन के लिए उमड़े सैकड़ों ग्रामीणों के चेहरे गमगीन नजर आए. मनीर अपने पीछे पत्नी, एक बेटी और एक बेटे को छोड़ गए. परिवार ने अपना सहारा खो दिया और खरडीह ने अपना वह बेटा खो दिया, जिसने जिंदगी के 26 साल देश की सेवा में समर्पित कर दिए.
मनीर अंसारी अब अपने गांव नहीं लौटेंगे, लेकिन देश की सेवा में बिताए उनके 26 साल और उनके बलिदान की कहानी खरडीह की मिट्टी में हमेशा याद की जाती रहेगी.
