मासूम से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास
पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया फैसला, पीड़िता को मिला न्याय
एक लाख का जुर्माना भी
जमुई. रिश्ते को कलंकित करने वाले एक शर्मनाक मामले में पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश महेश्वर दुबे की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. इसमें दोषी पंकज कुमार सिन्हा को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ ही कोर्ट ने दोषी पर एक लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है. यह फैसला एक मासूम बच्ची के 10 सालों से चुप्पी साधे दर्द का इंसाफ है.
क्या था मामला
नगर परिषद क्षेत्र का रहने वाला पड़ोसी पंकज कुमार सिन्हा (जिसे पीड़िता ””””मामा”””” कहकर पुकारती थी) ने बच्ची को अपने बच्चों के साथ खेलने के बहाने घर बुलाया. कमरे की कुंडी बंद कर मासूम के साथ दुष्कर्म व अप्राकृतिक यौनाचार किया. छोटी बच्ची इस दौरान न चिल्ला सकी, न विरोध कर सकी. घटना के बाद वह लहूलुहान होकर बेहोश हो गयी थी.
10 साल तक मासूम मुंह-कान से बहता रहा खून
इस जघन्य वारदात ने बच्ची के शरीर और मन पर ऐसे जख्म छोड़ दिये कि अगले 10-12 साल तक उसके मुंह व कान से खून निकलता रहा. मां उसे जमुई से पटना तक के तमाम डॉक्टरों के चक्कर लगाती रही, लेकिन कोई शारीरिक बीमारी नहीं पकड़ में आयी. बच्ची गुमसुम हो गयी. उसकी पढ़ाई छूट गयी और उसका व्यवहार पूरी तरह बदल गया. परिवार जब दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचा, तब 16 साल की हो चुकी किशोरी को मनोचिकित्सक डॉ सुनीता कुमारी के पास ले जाया गया. डॉक्टर ने सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि गहन काउंसलिंग शुरू की. इसी दौरान पीड़िता ने पहली बार अपना दर्द बताया. उसका सच सुनकर डॉक्टर भी सन्न रह गयी. डॉ सुनीता ने बिना देरी किये पीड़िता की मां को न्याय की राह दिखायी और खुद राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को सूचित कर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराया.
29 अप्रैल 2024 को दर्ज हुआ केस
ऑनलाइन शिकायत के आधार पर 29 अप्रैल 2024 को जमुई महिला थाने में एफआइआर दर्ज हुई और अगले ही दिन 30 अप्रैल को पंकज कुमार सिन्हा को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया गया. पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश महेश्वर दुबे ने विस्तृत जांच और गहन सुनवाई के बाद दोषी को सजा सुनाते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी बरतना न्याय के साथ अन्याय होगा. यह फैसला न सिर्फ पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का प्रतीक है, बल्कि उन सभी मासूमों के लिए संदेश भी है जिन्हें रिश्तों के नाम पर चुप रहने को मजबूर किया जाता है.