Jamui News: खैरा प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में चल रहे सीएससी केंद्र पर गुरुवार को अचानक अनुमंडल पदाधिकारी सौरभ कुमार की जांच पहुंची तो वहां मिले दस्तावेजों ने प्रशासन को भी चौंका दिया. जांच के दौरान सीएससी केंद्र से दाखिल-खारिज के करीब 30 आवेदन, जमीन से जुड़े कई दस्तावेज और राजस्व अभिलेख बरामद किए गए. लैपटॉप और मोबाइल की जांच में अंचल से संबंधित जमाबंदी और खतियानी की प्रतियां मिलने की बात सामने आयी है.
मामला सिर्फ कुछ कागजात मिलने तक सीमित नहीं है. जांच के दौरान जमीन संबंधी दस्तावेजों को लेकर वाट्सऐप चैट और रुपये के लेनदेन से जुड़ी बातचीत मिलने की जानकारी भी सामने आयी है. इसके बाद प्रशासन ने सीएससी से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त करने का निर्देश दिया है.
अंचल कार्यालय परिसर में ही कैसे पहुंच गये राजस्व के दस्तावेज?
गुरुवार दोपहर करीब एक बजे एसडीओ सौरभ कुमार, बीडीओ खैरा और राजस्व पदाधिकारी के साथ सीएससी केंद्र पहुंचे. उस समय नीमनवादा निवासी सीएससी संचालक प्रवीण कुमार और तेलियाडीह निवासी अभिषेक कुमार वहां मौजूद थे.
अधिकारियों के पहुंचने पर दोनों किसी अन्य व्यक्ति के खतियानी दस्तावेज की जांच करते पाए गए. इसी दौरान अधिकारियों को संदेह हुआ. इसके बाद दोनों के मोबाइल और कंप्यूटर की जांच की गयी.
जांच में जमीन से जुड़े कई दस्तावेज और राजस्व कार्यों से संबंधित कागजात मिलने की बात सामने आयी. सीएससी के लैपटॉप में खैरा अंचल कार्यालय से संबंधित महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों की प्रतियां भी मिलीं.
30 दाखिल-खारिज आवेदन ने बढ़ाया शक
जांच के दौरान सीएससी से दाखिल-खारिज से संबंधित करीब 30 आवेदन भी बरामद किए गए. इसके अलावा बड़ी संख्या में जमीन से जुड़े दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड मिले.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंचल कार्यालय के कामकाज से जुड़े ये दस्तावेज सीएससी संचालक तक पहुंचे कैसे?
दाखिल-खारिज की प्रक्रिया जमीन के स्वामित्व से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा है. ऐसे में इन आवेदनों और राजस्व अभिलेखों का किसी निजी केंद्र में मिलना प्रशासनिक स्तर पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
मोबाइल में जमीन के कागज और लेनदेन की चैट मिलने की बात
जांच के दौरान मोबाइल में जमीन संबंधी दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आयी है. इसके अलावा वाट्सऐप पर जमीन के काम को लेकर बातचीत और रुपये के लेनदेन से जुड़े चैट मिलने की भी बात कही गयी है.
हालांकि, इन चैट और दस्तावेजों का वास्तविक अर्थ क्या है और इनमें किसी अवैध लेनदेन का प्रमाण है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा.
प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटेगा कि सीएससी में मौजूद राजस्व रिकॉर्ड का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था और इन दस्तावेजों तक संचालकों की पहुंच कैसे बनी.
भीड़ जुटी तो मोबाइल छोड़कर भाग निकले दोनों युवक
जांच के दौरान सीएससी केंद्र के आसपास लोगों की भीड़ जुट गयी. इसी दौरान मौके का फायदा उठाकर दोनों युवक अपने-अपने मोबाइल वहीं छोड़कर वहां से निकल गये.
इसके बाद प्रशासन ने सीएससी से जुड़े कागजात और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की. लैपटॉप, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर और अन्य संबंधित सामग्री को भी जांच के लिए कब्जे में लेने का निर्देश दिया गया.
अब इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच से कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है.
जमीन का काम कराने वालों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
जमीन से जुड़े काम के लिए आम लोगों को अंचल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है. दाखिल-खारिज, जमाबंदी, खतियान और ऑनलाइन रिकॉर्ड में सुधार जैसे काम सीधे जमीन के अधिकार और सरकारी रिकॉर्ड से जुड़े होते हैं.
ऐसे में यदि इन कामों से संबंधित आवेदन या राजस्व अभिलेख किसी निजी केंद्र में अनधिकृत तरीके से रखे गये थे, तो इससे आम लोगों के दस्तावेजों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी सवाल उठ सकता है.
खासकर ग्रामीण इलाकों में कई लोग जमीन संबंधी ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी नहीं रखते. ऐसे में वे सीएससी या अन्य निजी केंद्रों की मदद लेते हैं. प्रशासनिक रिकॉर्ड के इस्तेमाल और निजी स्तर पर होने वाले काम के बीच स्पष्ट सीमा रहना बेहद जरूरी है.
बिचौलियों की भूमिका की भी जांच जरूरी
खैरा अंचल कार्यालय में राजस्व संबंधी कामों में बिचौलियों की सक्रियता की चर्चा पहले भी होती रही है. स्थानीय लोगों की ओर से आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कुछ लोग दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व कार्य कराने के नाम पर लोगों से संपर्क करते हैं.
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सीएससी से राजस्व अभिलेख और बड़ी संख्या में दाखिल-खारिज आवेदन मिलने के बाद बिचौलियों की भूमिका की जांच का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है.
प्रशासन को यह भी देखना होगा कि बरामद दस्तावेजों का किसी व्यक्ति की जमीन, दाखिल-खारिज या जमाबंदी से कोई प्रत्यक्ष संबंध है या नहीं.
Jamui News: अब जांच बताएगी ‘समानांतर व्यवस्था’ का सच
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण कड़ी प्रशासन की जांच है. जांच में यह पता लगाया जाएगा कि राजस्व अभिलेख सीएससी तक कैसे पहुंचे, करीब 30 दाखिल-खारिज आवेदन वहां क्यों रखे गये थे और मोबाइल व कंप्यूटर में मौजूद जमीन संबंधी सामग्री का इस्तेमाल किस काम के लिए किया जा रहा था.
एसडीओ सौरभ कुमार ने बताया कि मामले में विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया गया है. समाचार लिखे जाने तक मामले में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी नहीं थी.
जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह केवल नियमों के उल्लंघन का मामला है या इसके पीछे जमीन के सरकारी रिकॉर्ड से जुड़ा कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था.
