Jamui viral video FIR: जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा से कथित दुर्व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब पुलिस ने वीडियो प्रसारित करने और नाबालिग की पहचान उजागर करने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है. जमुई पुलिस ने ऐसे 120 सोशल मीडिया साइट संचालकों के खिलाफ साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज की है. एसपी विश्वजीत दयाल ने कहा कि नाबालिग की पहचान उजागर करना पॉक्सो एक्ट और आइटी एक्ट का उल्लंघन है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे पीड़िता की निजता का सम्मान करें और वायरल वीडियो को आगे साझा न करें.
मामले में पुलिस की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी है. वायरल वीडियो के आधार पर घटना की जांच के लिए सदर एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गयी है. पुलिस अब तक तीन नाबालिग आरोपितों को विधि निरुद्ध कर चुकी है. वहीं घटना में शामिल पांच लोगों की पहचान किये जाने की जानकारी दी गयी है. अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी की कार्रवाई जारी है.
वीडियो वायरल हुआ तो जांच के साथ शुरू हुई दूसरी कार्रवाई
मामला 19 सितंबर की शाम का बताया जा रहा है. पुलिस के अनुसार नाबालिग छात्रा अपने एक दोस्त के साथ मड़वा-प्रतापपुर के आसपास पहाड़ के समीप फोटो शूट करने गयी थी. लौटने के दौरान कुछ युवकों ने दोनों को रास्ते में रोक लिया.
पीड़िता के बयान के अनुसार, युवकों ने दोनों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार, छेड़खानी और अभद्र व्यवहार किया. इसी दौरान किसी ने घटना का वीडियो बना लिया. बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया.
घटना की सूचना पुलिस को 20 सितंबर को सीधे तौर पर नहीं मिली थी. सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और पीड़ितों की पहचान कर उनका बयान दर्ज कराया. इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गयी.
नाबालिग की पहचान उजागर करने वालों पर पुलिस की नजर
इस मामले में पुलिस ने अब सोशल मीडिया पर वीडियो के प्रसार को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है. एसपी विश्वजीत दयाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया है.
एसपी के अनुसार, सोशल मीडिया पर नाबालिग की पहचान उजागर की जा रही थी. पुलिस ने इसे पॉक्सो एक्ट और आइटी एक्ट का उल्लंघन माना है. इसी आधार पर 120 सोशल मीडिया साइट संचालकों के खिलाफ साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी है.
पुलिस की यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होना उसके लिए घटना के बाद भी सामाजिक और मानसिक परेशानी का कारण बन सकता है. वीडियो को बार-बार साझा किये जाने से उसकी निजता और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.
पुलिस ने कहा, वीडियो शेयर करने से बचें
जमुई पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वायरल वीडियो को डाउनलोड कर दोबारा पोस्ट या शेयर नहीं करें. पीड़िता की पहचान सामने आने वाली किसी भी सामग्री को प्रसारित करने से बचने को कहा गया है.
पुलिस सोशल मीडिया से वीडियो हटाने की कार्रवाई भी कर रही है. साथ ही वीडियो को किसने बनाया, किसने प्रसारित किया और किन-किन सोशल मीडिया अकाउंट से इसे आगे फैलाया गया, इसकी जांच की जा रही है.
ऐसे मामलों में सोशल मीडिया पर किसी सामग्री को शेयर करना महज ऑनलाइन गतिविधि नहीं रह जाता. यदि सामग्री में नाबालिग की पहचान उजागर होती है, तो उसके कानूनी परिणाम भी हो सकते हैं. जमुई पुलिस की 120 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी इसी पहलू को रेखांकित करती है.
तीन नाबालिग विधि निरुद्ध, पांच लोगों की पहचान
मुख्य घटना की जांच में पुलिस को भी कई सुराग मिले हैं. एसपी के अनुसार, अब तक तीन नाबालिगों को विधि निरुद्ध किया गया है. पकड़े गये किशोरों की उम्र 14 से 17 वर्ष के बीच बतायी गयी है.
पुलिस ने इनके घर से मोबाइल फोन भी बरामद किये हैं. जांच के दौरान इन मोबाइल फोन में घटना से संबंधित वीडियो क्लिप मिलने की बात सामने आयी है. इससे पुलिस को यह पता लगाने में मदद मिली कि घटना का वीडियो किन लोगों ने बनाया था.
पुलिस के अनुसार घटना में शामिल पांच लोगों की पहचान की जा चुकी है. इनमें से तीन को विधि निरुद्ध किया गया है, जबकि अन्य की तलाश और पहचान की प्रक्रिया जारी है.
एसआईटी कर रही पूरे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष जांच टीम बनायी गयी है. टीम घटना से जुड़े वीडियो, फोटो, मोबाइल फोन और पीड़िता के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम को जोड़ने में जुटी है.
पुलिस के सामने एक तरफ घटना में शामिल सभी लोगों तक पहुंचने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री को नियंत्रित करना भी जरूरी है. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि घटना का वीडियो कितने लोगों ने बनाया और किस माध्यम से यह सोशल मीडिया पर पहुंचा.
एसपी ने कहा है कि पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है. अन्य लोगों की पहचान और उन्हें पकड़ने की कार्रवाई जारी है.
Jamui viral video FIR: घटना के बाद निजता और सुरक्षा का सवाल भी सामने आया
जमुई की इस घटना ने एक साथ दो महत्वपूर्ण सवाल खड़े किये हैं. पहला, सुनसान या कम आवाजाही वाले स्थानों पर छात्र-छात्राओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो. दूसरा, किसी घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की जिम्मेदारी क्या हो.
घटना के बाद वीडियो का प्रसार पीड़िता के लिए दूसरी परेशानी बन सकता है. इसलिए पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने वाली सामग्री को आगे न बढ़ायें.
फिलहाल पुलिस की जांच दो स्तरों पर आगे बढ़ रही है. एक ओर घटना में शामिल आरोपितों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, दूसरी ओर नाबालिग की पहचान उजागर करने वाले सोशल मीडिया संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है.