Jamui News: मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल जहां बच्चों और युवाओं के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है, वहीं साइबर अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खोल दिए हैं. फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी, ओटीपी फ्रॉड और हाल के दिनों में तेजी से सामने आए 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे साइबर अपराधों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में जमुई जिला प्रशासन ने भविष्य की पीढ़ी को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है. अब जिले के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को साइबर सुरक्षा और डिजिटल अरेस्ट से बचाव का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.
सभी स्कूलों में चलेगा साइबर जागरूकता अभियान
जिलाधिकारी नवीन ने जिले के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों में साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश जारी किया है. इस अभियान का उद्देश्य छात्रों को इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग सिखाना और उन्हें साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों से परिचित कराना है.
जिला प्रशासन का मानना है कि यदि बच्चों को शुरुआत से ही डिजिटल सुरक्षा की सही जानकारी दी जाए तो वे खुद भी सुरक्षित रहेंगे और अपने परिवार को भी जागरूक कर सकेंगे.
मुख्य सचिव की बैठक के बाद लिया गया फैसला
यह पहल बिहार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 17 जुलाई 2026 को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद शुरू की गई है. बैठक के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र जारी कर सभी स्कूलों में इस कार्यक्रम का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.
इससे साफ है कि राज्य स्तर पर साइबर अपराधों को रोकने के लिए स्कूल आधारित जागरूकता को प्राथमिकता दी जा रही है.
साइबर पुलिस बताएगी कैसे बचें ठगी से
इस अभियान की खास बात यह है कि इसमें केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि साइबर डीएसपी और साइबर पुलिस की टीम भी शामिल होगी. विशेषज्ञ स्कूलों में पहुंचकर छात्रों को बताएंगे कि साइबर अपराधी किस तरह लोगों को डराकर ठगी करते हैं.
बच्चों को समझाया जाएगा कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती. यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल या फोन पर डराने की कोशिश करे, तो घबराने के बजाय तुरंत इसकी शिकायत करनी चाहिए.
इसके अलावा छात्रों को फर्जी लिंक, संदिग्ध वेबसाइट, ओटीपी शेयर करने के खतरे, सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने के जोखिम और ऑनलाइन भुगतान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जाएगी.
क्यों जरूरी है यह पहल?
आज स्कूली बच्चे इंटरनेट, ऑनलाइन गेम, सोशल मीडिया और डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म का पहले से कहीं अधिक उपयोग कर रहे हैं. ऐसे में साइबर अपराधियों का निशाना भी यही वर्ग बनता जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर सुरक्षा की जानकारी जितनी जल्दी मिलेगी, बच्चे उतनी ही आसानी से ऑनलाइन ठगी और फर्जीवाड़े से खुद को बचा सकेंगे. यह अभियान डिजिटल साक्षरता को मजबूत करने के साथ-साथ साइबर अपराधों पर रोक लगाने में भी मददगार साबित हो सकता है.
Jamui News: डीएम बोले- हर विद्यार्थी बने साइबर स्मार्ट
जिलाधिकारी नवीन ने कहा कि आज बच्चे और युवा डिजिटल दुनिया का सबसे अधिक उपयोग कर रहे हैं. इसलिए जरूरी है कि वे साइबर अपराधियों के आसान शिकार न बनें. उन्होंने कहा कि सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है और जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जमुई का हर विद्यार्थी साइबर स्मार्ट बने तथा अपने परिवार और समाज को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करे.
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