जमुई सदर अस्पताल में एक माह से बंद पड़े दोनों ऑक्सीजन प्लांट, सिलेंडर के भरोसे गंभीर मरीजों की सांस

जमुई सदर अस्पताल में लगे दोनों ऑक्सीजन प्लांट एक महीने से अधिक समय से खराब पड़े हैं. इस कारण अस्पताल में पाइपलाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप है और गंभीर मरीजों की जान ऑक्सीजन सिलेंडर के भरोसे है. स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और अपर्याप्त रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

जमुई. सदर अस्पताल में मरीजों को निर्बाध ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए लगाए गए 500 एलपीएम और 950 एलपीएम क्षमता वाले दोनों ऑक्सीजन प्लांट पिछले एक माह से अधिक समय से तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े हैं. दोनों प्लांट के बंद रहने से अस्पताल में पाइपलाइन के माध्यम से ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित है. फिलहाल इमरजेंसी समेत जरूरत वाले मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर के माध्यम से ऑक्सीजन दी जा रही है. जीवनरक्षक सुविधा के लिए लगाए गए दोनों प्लांट के लंबे समय से बंद रहने से गंभीर मरीजों के इलाज और अस्पताल की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

इमरजेंसी में सिलेंडर बदलने की मशक्कत, पाइपलाइन सुविधा बनी बेकार

सबसे गंभीर स्थिति इमरजेंसी कक्ष में देखने को मिल रही है, जहां जरूरत के अनुसार मरीजों के बेड तक ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाये जा रहे हैं. स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों की स्थिति के अनुसार सिलेंडर की निगरानी करनी पड़ रही है और खाली होने पर समय पर उसे बदलना पड़ता है.

अस्पताल में पाइपलाइन आधारित ऑक्सीजन आपूर्ति की सुविधा होने के बावजूद प्लांट बंद रहने से प्रबंधन को वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ रहा है. गंभीर मरीजों के इलाज के दौरान ऑक्सीजन की निरंतर आवश्यकता को देखते हुए यह व्यवस्था अतिरिक्त चुनौती पैदा कर रही है.

एक माह से खराबी, अब तक नहीं हुआ स्थायी समाधान

ऑक्सीजन प्लांट के केयरटेकर के अनुसार दोनों प्लांट में तकनीकी खराबी आने के बाद उनसे ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद करनी पड़ी है. फिलहाल मरीजों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ऑक्सीजन उपलब्ध करायी जा रही है.

एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी दोनों प्लांट के चालू नहीं होने से अस्पताल की रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों और अस्पताल कर्मियों का कहना है कि ऑक्सीजन जैसी जीवनरक्षक सुविधा को लंबे समय तक बंद रखना गंभीर मामला है. उनका कहना है कि नियमित देखभाल और समय पर तकनीकी जांच की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए.

एक कर्मी के भरोसे दो ऑक्सीजन प्लांट

सदर अस्पताल परिसर में स्थापित दोनों ऑक्सीजन प्लांट की देखरेख के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से मात्र एक कर्मी की प्रतिनियुक्ति किये जाने की बात सामने आयी है. दो प्लांट के संचालन, निगरानी और नियमित रखरखाव के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित कर्मियों की जरूरत होती है.

कर्मियों की कमी के कारण प्लांट से दिन में ऑक्सीजन की आपूर्ति और रात में सिलेंडर पर निर्भरता की बात भी सामने आ रही है. ऐसे में संचालन के साथ नियमित रखरखाव और तकनीकी निगरानी भी प्रभावित होने की आशंका है. समय रहते छोटी तकनीकी खराबी की पहचान कर उसे दूर किया जाये तो प्लांट को लंबे समय तक बंद रखने की स्थिति से बचा जा सकता है.

प्लांट बंद होने से बढ़ी सिलेंडर की खपत

अस्पताल सूत्रों के अनुसार दोनों प्लांट बंद रहने के कारण ऑक्सीजन सिलेंडर की खपत बढ़ गयी है. वहीं कुछ सूत्रों ने सिलेंडर की बढ़ी खपत से जुड़े कमीशन के लेन-देन की चर्चा भी की है. हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

यदि इस तरह की शिकायत सामने आती है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत होगी, ताकि ऑक्सीजन जैसी जीवनरक्षक सुविधा को लेकर किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका पर विराम लगाया जा सके.

कोविड काल में लाखों की लागत से लगाए गये थे दोनों प्लांट

कोविड-19 महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीजों को परेशानी नहीं हो, इसे लेकर केंद्र सरकार की पहल के तहत सदर अस्पताल परिसर में 500 एलपीएम और 950 एलपीएम क्षमता वाले दो ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किये गये थे. इसके साथ ही इमरजेंसी कक्ष के बेड तक पाइपलाइन के माध्यम से ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था की गयी थी.

कोविड काल में विकसित की गयी यह व्यवस्था अस्पताल के लिए महत्वपूर्ण जीवनरक्षक सुविधा थी. ऐसे में दोनों प्लांट के लंबे समय से बंद रहने से करोड़ों रुपये की स्वास्थ्य अवसंरचना के उपयोग, संचालन और रखरखाव पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

फोटो- सदर अस्पताल परिसर स्थित ऑक्सीजन प्लांट

विभाग को भेजा पत्र, पटना से टेक्नीशियन आने का इंतजार

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ थनीष कुमार ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट में तकनीकी गड़बड़ी के कारण सप्लाई बाधित हुई है. इस संबंध में विभाग को पत्र लिखा गया है. पटना से टेक्नीशियन आने के बाद प्लांट को दोबारा शुरू कर दिया जायेगा.

उन्होंने बताया कि कर्मियों की कमी को लेकर भी विभाग को पत्र भेजा गया है और उम्मीद है कि जल्द ही समस्या का समाधान हो जायेगा.

सवाल यह कि कब तक सिलेंडर के भरोसे चलेगी व्यवस्था

जीवनरक्षक ऑक्सीजन की व्यवस्था के लिए स्थापित दोनों प्लांट एक माह से अधिक समय तक बंद हैं, लेकिन अब तक तकनीकी खराबी दूर नहीं हो सकी है. अस्पताल प्रबंधन द्वारा विभाग को पत्र भेजे जाने के बाद अब पटना से टेक्नीशियन के आने का इंतजार है. सवाल यह है कि गंभीर मरीजों के लिए निर्बाध ऑक्सीजन उपलब्ध कराने वाली मशीनों की खराबी इतने लंबे समय तक क्यों बनी रही और स्थायी समाधान में देरी क्यों हुई. मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह भी बड़ा सवाल है कि दोनों प्लांट कब तक दोबारा चालू होंगे और सदर अस्पताल में पाइपलाइन से ऑक्सीजन की नियमित आपूर्ति कब बहाल होगी.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar news desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >