जमुई में RTI ने खोली स्कूल भवन निर्माण की पोल? कागजों में पूरा, जमीन पर अधूरा दिखा काम, उठे बड़े सवाल

झाझा से ऋताम्बर सिंह की रिपोर्ट. Jamui News: जमुई जिले के झाझा स्थित महात्मा गांधी स्मारक प्लस टू उच्च माध्यमिक विद्यालय में निर्माण कार्य को लेकर नया विवाद सामने आया है. विद्यालय परिसर में समग्र शिक्षा अभियान के तहत बनाए जा रहे आर्ट एंड क्राफ्ट भवन, कंप्यूटर कक्ष और विज्ञान कक्ष के निर्माण को लेकर […]

झाझा से ऋताम्बर सिंह की रिपोर्ट.

Jamui News: जमुई जिले के झाझा स्थित महात्मा गांधी स्मारक प्लस टू उच्च माध्यमिक विद्यालय में निर्माण कार्य को लेकर नया विवाद सामने आया है. विद्यालय परिसर में समग्र शिक्षा अभियान के तहत बनाए जा रहे आर्ट एंड क्राफ्ट भवन, कंप्यूटर कक्ष और विज्ञान कक्ष के निर्माण को लेकर विभागीय अभिलेखों और जमीनी स्थिति में अंतर होने का दावा किया गया है. सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दस्तावेजों और स्थल निरीक्षण के आधार पर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

निर्माण कार्य को लेकर पहले भी मांगा गया था स्पष्टीकरण

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार बिहार शिक्षा परियोजना, जमुई ने 24 फरवरी 2026 को विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. राजाराम नागमणि से यह स्पष्टीकरण मांगा था कि निर्माण कार्य पूर्ण हुए बिना संबंधित मद की राशि की निकासी क्यों की गई. विभागीय पत्र में मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग से जोड़ते हुए कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी.

अभिलेखों में निर्माण पूरा, लेकिन निरीक्षण में दिखा अधूरा भवन

बाद में जिला शिक्षा पदाधिकारी, जमुई द्वारा 29 अप्रैल 2026 को जिला जन शिकायत निवारण कोषांग को भेजे गए पत्र में बताया गया कि विद्यालय से स्पष्टीकरण प्राप्त कर लिया गया है और निर्माण कार्य पूरा करा लिया गया है. लेकिन आरटीआई कार्यकर्ता सूरज कुमार द्वारा प्राप्त सूचनाओं के आधार पर किए गए स्थल निरीक्षण में स्थिति अलग दिखाई दी.

निरीक्षण के दौरान आर्ट एंड क्राफ्ट भवन का निर्माण कार्य अधूरा पाया गया. भवन के कई हिस्सों में कार्य जारी होने के संकेत मिले, जिससे विभागीय दावों पर सवाल उठने लगे हैं.

समय सीमा बीतने के बाद भी पूरा नहीं हुआ निर्माण

दस्तावेजों के अनुसार संवेदक संजीव कुमार साह ने शपथ पत्र देकर 30 जून 2024 तक निर्माण कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया था. शपथ पत्र में समय पर कार्य पूरा नहीं होने पर दंडात्मक कार्रवाई का भी उल्लेख था. इसके बावजूद निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त नहीं होने का दावा किया जा रहा है.

आरटीआई कार्यकर्ता ने उठाए सवाल, जांच की मांग

आरटीआई कार्यकर्ता सूरज कुमार ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और स्थल पर दिख रही वास्तविक स्थिति में स्पष्ट विरोधाभास है. उनका कहना है कि यदि विभागीय रिकॉर्ड में निर्माण कार्य पूर्ण दर्शाया गया है तो अधूरा निर्माण किस आधार पर मौजूद है. उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

स्थानीय लोगों ने भी मांगी पारदर्शिता

स्थानीय लोगों और शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए. उनका मानना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होने से वास्तविक स्थिति सामने आएगी और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सकेगी.

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Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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