जमुई लोकसभा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और बुनियादी समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर सांसद अरुण भारती ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पटना में औपचारिक मुलाकात की.
इस दौरान उन्होंने दशकों से लंबित सिंचाई परियोजनाओं, जर्जर पुलों के कारण चरमराए आवागमन, राष्ट्रीय उच्च पथ (NH) के क्षेत्रीय प्रशासनिक ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं के बदहाल तंत्र से जुड़े गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से रखा. सांसद ने चारों प्रमुख समस्याओं को लेकर एक विस्तृत मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपते हुए मुख्यमंत्री से ठोस और समयबद्ध कार्रवाई का अनुरोध किया.
1985 से अधर में अपर बदुआ जलाशय परियोजना, किसानों की आस
सांसद ने चकाई प्रखंड स्थित अपर बदुआ जलाशय योजना की धीमी प्रगति पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया. उन्होंने अवगत कराया कि वर्ष 1976 में स्वीकृत हुई यह बहुप्रतीक्षित परियोजना 1985 से पूरी तरह ठप पड़ी है.
इस योजना के धरातल पर उतरने से स्थानीय 9 गांवों की 1285 हेक्टेयर कृषि भूमि को बारहमासी सिंचाई का लाभ मिलेगा. सांसद ने इस परियोजना के लिए पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति, नए सिरे से डीपीआर तैयार करने, विशेष बजटीय प्रावधान करने और बांध की तकनीकी सुरक्षा जांच कराने की मांग रखी.
गिद्धेश्वर काजवे पुल के 8 पायों में दरार, तुरंत बने डायवर्सन
खैरा प्रखंड अंतर्गत गिद्धेश्वर (ललदैया) काजवे पुल की जर्जर हालत का मसला उठाते हुए सांसद ने बताया कि पुल के आठ पायों में गंभीर दरारें आ चुकी हैं, जिससे इस मार्ग पर भारी वाहनों का परिचालन कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकता है.
पुल के क्षतिग्रस्त होने से आसपास की छह पंचायतों का सीधा सड़क संपर्क बाधित हो गया है. सांसद ने विशेषज्ञों की टीम से अविलंब तकनीकी मुआयना कराने, स्थायी मरम्मत शुरू करने और तब तक आमजन की सुगम आवाजाही के लिए तत्काल प्रभाव से वैकल्पिक डायवर्सन पथ बनाने का आग्रह किया.
मुंगेर नहीं, अब जमुई में ही बने अलग राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल
जिले में एनएच नेटवर्क के प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की मांग करते हुए सांसद ने तर्क दिया कि संबंधित प्रमंडल के लगभग 59 प्रतिशत राष्ट्रीय राजमार्ग जमुई जिले की भौगोलिक सीमा में आते हैं, जबकि इसका प्रमंडलीय कार्यालय मुंगेर में स्थित है.
मुंगेर कार्यालय होने से सड़कों के रखरखाव और विकास कार्यों की नियमित निगरानी प्रभावित होती है. उन्होंने जमुई मुख्यालय में कार्यपालक अभियंता सहित आवश्यक प्रशासनिक पदों का सृजन कर पृथक एनएच प्रमंडल अधिसूचित करने की मांग की.
सदर अस्पताल में 18 में से 17 पद खाली, बंद पड़ा है नवनिर्मित आईसीयू
जिले की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता जाहिर करते हुए सांसद ने जमीनी हकीकत बयां की कि सदर अस्पताल के जिला-स्तरीय चिकित्सकीय संवर्ग में 18 में से 17 पद रिक्त पड़े हैं. डॉक्टरों के घोर अभाव के चलते मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है.
अस्पताल में बनकर तैयार अत्याधुनिक आईसीयू (ICU) केवल पैरामेडिकल व डॉक्टरों के अभाव में धूल फांक रहा है, वहीं एसएनसीयू (SNCU) में नवजात शिशुओं के इलाज के लिए बाल रोग विशेषज्ञ तक नहीं हैं. सांसद ने इन रिक्तियों को तत्काल भरने और जमुई की चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति पर मुख्यमंत्री स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कराने का अनुरोध किया.
