Jamui News: जमुई में आमतौर पर शनिवार को बच्चे स्कूल की कक्षा में पढ़ाई करते हैं, लेकिन जमुई में शनिवार को कई सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई छोड़कर कचहरी चौक पर पहुंचे. यहां उन्होंने ‘युवा संसद’ लगाकर अपने स्कूलों की बदहाल व्यवस्था की तस्वीर सामने रखी.
किसी बच्चे ने स्कूल में शौचालय नहीं होने की बात कही तो किसी ने जर्जर भवन और पानी की समस्या बतायी. बच्चों का कहना था कि कई सरकारी स्कूलों को प्लस टू का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन उसके अनुरूप जरूरी संसाधन अब तक उपलब्ध नहीं कराये गये हैं.
जिले के अलग-अलग विद्यालयों से पहुंचे छात्र-छात्राओं ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को बेझिझक सामने रखा. बच्चों की इस पहल ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिये हैं.
‘प्लस टू का दर्जा मिला, लेकिन शौचालय तक नहीं’
प्लस टू उच्च विद्यालय खलारी की छात्रा पूजा कुमारी ने अपने विद्यालय की समस्या युवा संसद में रखी.
उन्होंने बताया कि विद्यालय को प्लस टू का दर्जा मिल चुका है, लेकिन वहां शौचालय तक की सुविधा नहीं है. पर्याप्त क्लासरूम भी उपलब्ध नहीं हैं.
पूजा के मुताबिक, विद्यालय में महज तीन कमरे हैं और इन्हीं कमरों में कक्षा 11 तक की पढ़ाई होती है. विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले कमरों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है.
बच्चों के लिए उच्च कक्षाओं की पढ़ाई की व्यवस्था तो शुरू कर दी गयी, लेकिन उसके लिए जरूरी आधारभूत ढांचे का अभाव उनकी बड़ी चिंता है.
एक कमरे की छत से टपकता है पानी, दूसरा जर्जर
उत्क्रमित मध्य विद्यालय लालपुर की छात्रा सुप्रिया राज ने भी अपने स्कूल की समस्याओं को सामने रखा.
उन्होंने बताया कि विद्यालय के एक कमरे की छत से पानी टपकता है, जबकि दूसरा कमरा जर्जर हालत में है. ऐसे में बारिश के दौरान विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
सुप्रिया ने विद्यालय में शौचालय और पेयजल की सुविधा नहीं होने की बात भी कही. उनका कहना था कि स्कूल में चापाकल तक नहीं है.
पानी के लिए गांव के घरों पर निर्भर बच्चे
विद्यालय में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने का असर बच्चों की रोजमर्रा की पढ़ाई पर भी पड़ता है.
सुप्रिया के अनुसार, बिजली नहीं रहने पर पानी के लिए गांव के लोगों के घरों में जाना पड़ता है. स्कूल में ही पर्याप्त पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से विद्यार्थियों को परेशानी उठानी पड़ती है.
बच्चों की ओर से उठाया गया यह मुद्दा सिर्फ सुविधा का नहीं, बल्कि विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए जरूरी बुनियादी जरूरतों का भी है.
कचहरी चौक पर बच्चों ने रखे अपने सवाल
जिला मुख्यालय स्थित कचहरी चौक पर आयोजित युवा संसद में जिले के विभिन्न सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया.
बच्चों ने अपने-अपने स्कूलों की समस्याओं को सामने रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की. शौचालय, पेयजल, जर्जर भवन और पर्याप्त कक्षाओं की कमी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे.
युवा संसद के जरिए बच्चों ने यह बताने की कोशिश की कि स्कूलों में पढ़ाई के लिए सिर्फ शिक्षक और नामांकन पर्याप्त नहीं हैं. इसके लिए सुरक्षित भवन, पर्याप्त कमरे, पेयजल और स्वच्छ शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी जरूरी हैं.
‘जेन जी और जेन अल्फा ने खुद उठायी आवाज’
भाकपा नेता बाबू साहब ने कहा कि जेन जी और जेन अल्फा के बच्चों ने शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त समस्याओं को लेकर युवा संसद का आयोजन किया है.
उन्होंने कहा कि बिहार में कई जगह सरकारी स्कूलों की स्थिति बदहाल है. वहीं निजी स्कूलों की मनमानी भी जारी है. इन्हीं मुद्दों को लेकर बच्चों ने अपनी आवाज उठायी है.
उन्होंने कहा कि युवा संसद के माध्यम से बच्चों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी है.
Jamui News: बच्चों की आवाज अब प्रशासन के लिए सवाल
युवा संसद में उठाये गये सवाल सीधे सरकारी स्कूलों की बुनियादी व्यवस्था से जुड़े हैं. जिस उम्र में बच्चे अपनी कक्षाओं और भविष्य की पढ़ाई पर ध्यान देते हैं, उसी उम्र में उन्हें अपने स्कूल में शौचालय, पानी और सुरक्षित कमरों जैसी सुविधाओं के लिए आवाज उठानी पड़ रही है.
प्लस टू का दर्जा मिलने के बाद भी यदि विद्यालय में पर्याप्त कमरे नहीं हैं, या जर्जर भवन और पेयजल की समस्या बनी हुई है, तो इसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूल के माहौल पर पड़ना स्वाभाविक है.
अब देखना यह है कि युवा संसद में बच्चों द्वारा उठाये गये इन सवालों पर शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाये जाते हैं. बच्चों की आवाज ने सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है.
