Cyber Crime: जमुई जिले में साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. जांच के दौरान इस नेटवर्क का पाकिस्तान कनेक्शन भी सामने आ सकता है. पुलिस ने सदर थाना क्षेत्र के दौलतपुर गांव निवासी वीरू कुमार को गिरफ्तार किया है. उसके मोबाइल से कई बैंक खातों के क्यूआर कोड बरामद हुए हैं, जिनसे जुड़े खातों में 37.40 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं. प्रारंभिक जांच में इन क्यूआर कोड का संबंध पाकिस्तान के मोबाइल नंबरों से मिलने की बात सामने आई है. पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है.
तकनीकी सूचना पर हुई गिरफ्तारी
साइबर डीएसपी अभिषेक कुमार ने बताया कि 22 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय की तकनीकी शाखा और साइबर थाना को सूचना मिली थी कि दौलतपुर निवासी वीरू कुमार साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क में सक्रिय है. सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस ने छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया. तलाशी के दौरान उसके पास से एक मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किये गये.
मोबाइल से मिले कई बैंक खातों के क्यूआर कोड
मोबाइल की जांच में अलग-अलग बैंक खातों के कई क्यूआर कोड मिले. प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ये बैंक खाते आरोपी के नाम पर नहीं हैं. पूछताछ में वीरू कुमार ने बताया कि हरियाणा में रहने वाला उसका एक सहयोगी उसे विभिन्न बैंक खातों के क्यूआर कोड भेजता था. वह उन क्यूआर कोड को आगे संबंधित लोगों तक पहुंचाता था. साइबर ठगी की रकम इन खातों में जमा होने के बाद उसकी रसीद आरोपी को भेजी जाती थी, जिसे वह अपने सहयोगी तक पहुंचा देता था.
37.40 लाख रुपये की साइबर ठगी से जुड़े खाते
जांच में सामने आया कि आरोपी के मोबाइल में मिले क्यूआर कोड जिन खातों से जुड़े हैं, उनमें अब तक 37 लाख 40 हजार रुपये की साइबर ठगी दर्ज है. पुलिस का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क साइबर अपराध से अर्जित रकम की मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है. पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने तीन अन्य सहयोगियों के नाम भी बताए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है.
पाकिस्तान कनेक्शन की जांच जारी
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसे कई क्यूआर कोड पाकिस्तान के मोबाइल नंबरों से भेजे जाते थे. इस जानकारी के बाद जांच एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि पाकिस्तान से संचालित संपर्क का उद्देश्य क्या था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका है. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कहीं यह किसी अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है.
न्यायिक हिरासत में भेजा गया आरोपी
आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. साइबर डीएसपी अभिषेक कुमार ने बताया कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाई जा रही है और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है.
ऐसे होता है क्यूआर कोड का इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार साइबर ठग बैंक खाते की जानकारी साझा करने के बजाय अक्सर क्यूआर कोड का इस्तेमाल करते हैं. इससे रकम का ट्रांसफर तेजी से हो जाता है और लेनदेन को अलग-अलग खातों के माध्यम से घुमाना आसान हो जाता है. साइबर डीएसपी अभिषेक कुमार ने बताया कि ठग फिनटेक ऐप के जरिए मर्चेंट (बिजनेस) अकाउंट भी बना लेते हैं, जिससे पैसों का ट्रांजेक्शन और अधिक तेज हो जाता है.
मनी लॉन्ड्रिंग का तरीका भी आया सामने
Cyber Crime: जांच में यह भी सामने आया कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को छिपाने के लिए अपराधी उसे कई बैंक खातों में लगातार ट्रांसफर करते हैं. कई मामलों में कमीशन आधारित ऐप, गेमिंग प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जाता है. रकम को कई खातों में घुमाने के बाद एटीएम से निकासी या ऑनलाइन खरीदारी के जरिए खर्च किया जाता है, जिससे उसकी वास्तविक पहचान छिपायी जा सके.
