जमुई. जिले के बरहट प्रखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था की व्यवस्था बदहाल है. लगभग एक लाख की आबादी वाले इस प्रखंड में स्थित एकमात्र होम्योपैथिक अस्पताल खुद बीमार हो चुका है. स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि यहां तैनात चिकित्सक को खुद झाड़ू लेकर अस्पताल की सफाई करनी पड़ रही है.
सामुदायिक भवन में चल रहा अस्पताल
बरहट स्थित यह होम्योपैथिक अस्पताल अब तक अपने स्थायी भवन से वंचित है. वर्तमान में यह सामुदायिक भवन के एक छोटे से कमरे में संचालित हो रहा है. एक ओर जहां बैठने की समुचित व्यवस्था तक नहीं है. दवाओं का भंडारण भी अव्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है. अस्पताल में न फार्मासिस्ट, न नर्स और न ही सफाईकर्मी भी नहीं है.डॉक्टर बने सफाईकर्मी
अस्पताल में पदस्थापित डॉक्टर वीरेंद्र कुमार न केवल मरीजों का इलाज करते हैं, बल्कि अस्पताल की सफाई भी खुद ही करते हैं. डॉक्टर ने बताया कि उनकी नियुक्ति दो महीने पहले हुई है, लेकिन अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है. उन्होंने कहा कि दवाएं भी सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है. उन्होंने कहा कि कर्मी के अभाव में सफाई कार्य भी स्वयं ही करना पड़ता है.बुनियादी सुविधाओं का टोटा
अस्पताल में शौचालय, पेयजल, बिजली और पंखा जैसी सामान्य सुविधाएं तक नहीं हैं. गर्मी और बरसात के मौसम में मरीजों को बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. कई बार आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध नहीं रहतीं. इससे मरीजों को निजी क्लिनिक या दूर के सरकारी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है.ग्रामीणों ने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार भले ही कागजों पर स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू बताती हो, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही है. यहां के लोग आज भी उचित इलाज के लिए तरस रहे हैं. आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग निजी अस्पताल का खर्च वहन नहीं कर पाते और इलाज के अभाव में रोग झेलने को मजबूर हैं. लोगों ने सरकार व जिला प्रशासन से अपील की है कि इस अस्पताल की स्थिति पर तत्काल संज्ञान लिया जाए. अस्पताल के लिए स्थायी भवन का निर्माण, दवाओं की नियमित आपूर्ति, नर्स, फार्मासिस्ट एवं सफाईकर्मी की नियुक्ति जल्द से जल्द की जाये. तभी आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
